नंदिनी-अहिवारा : किसी अपने को अंतिम विदाई देना हर परिवार के लिए भावुक पल होता है, लेकिन सेमरिया में बलराम मरकाम की शवयात्रा को मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। रास्ते में घुटनों से ऊपर पानी से भरा नाला था और चारों तरफ फिसलन भरा कीचड़। शव लेकर आगे बढ़ने में जरा सी चूक जानलेवा हो सकती थी। नाले में बह जाने के डर के बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं छोड़ी और किसी तरह नाला पार कर शव को मुक्तिधाम पहुंचाया और अंतिम संस्कार किया।
नाला गुजरता है। धमधा जनपद पंचायत की ग्राम सेमरिया में करीब साढ़े तीन हजार की पंचायत बागडूमर के आश्रित गांव आबादी है। गांव के कच्चे मार्ग के बीच से 7 फीट गहरा नाला बारिश के दिनों में इसमें ढाई से चार फीट तक पानी रहता है। वहीं कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ में बदल जाता है। वैकल्पिक रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों को पानी भरे नाले से होकर ही आना-जाना पड़ता है। बदल जाता ग्रामीणों के मुताबिक कच्चे मार्ग को बनाने की मांग करीब डेढ़ साल से की नहीं बनी।

नाले पर पुलिया नहीं होने से जा रही है, लेकिन अब तक सड़क परेशानी और बढ़ जाती है। बलराम की गंभीर तस्वीर सामने ला दी। मरकाम की शवयात्रा ने इस समस्या ग्रामीणों का कहना है कि जब किसी सुरक्षित रास्ता नहीं मिल पा रहा है, मृतक को अंतिम यात्रा के लिए भी तो बारिश में रोजमर्रा की जिंदगी लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने कितनी मुश्किल होगी, इसका अंदाजा मुक्तिधाम तक तत्काल पहुंच मार्ग की मांग की है। उन्होंने अफसरों से मौका मुआयना कर समस्या का बनाने और नाले पर पुलिया निर्माण लगाई है। स्थायी समाधान करने की गुहार
जनप्रतिनिधि और अफसर केवल आश्वासन दे रहे
ग्रामीणों की समस्या की जानकारी है। धमधा जनपद सीईओ से सेमरिया के कच्ची सड़क को बीएमडब्ल्यू मार्ग में बदलने का प्रस्ताव भेजा है। 20 मई को क्षेत्र में हुए सुशासन तिहार में भी इसकी मांग की थी। 8 जुलाई को कलेक्टर को चिट्ठी लिखी है। इससे पहले क्षेत्रीय विधायक से चर्चा कर चुकी हूं। वहां से आश्वासन मिला है। दामिनी साहू, सरपंच ग्राम पंचायत बागडुमर- सेमरिया
तेज बह रहे नाले को पार कर बलराम मरकाम के शव को अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम ले जाते ग्रामीण।