नई दिल्ली। भारत सरकार ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में तेजी से कारोबार करने में सक्षम बनाने के लिए निर्यात नियमों में बड़ा बदलाव किया है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) व्यवस्था को सरल और व्यापक बनाया है। सरकार का कहना है कि इन सुधारों से प्रक्रियागत बोझ कम होगा और निर्यात मंजूरी की प्रक्रिया आसान होगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में किए गए इन बदलावों से भारतीय रक्षा कंपनियों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय निविदाओं में तेजी से भाग ले सकेंगी और विदेशी रक्षा प्रदर्शनियों में अपने उत्पादों को कम प्रक्रियागत देरी के साथ प्रदर्शित कर सकेंगी।
अधिकांश गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात में परामर्श की जरूरत नहीं
नई व्यवस्था के तहत अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात के लिए हितधारकों से परामर्श की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। हालांकि संवेदनशील देशों, महत्वपूर्ण तकनीकों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जरूरी सुरक्षा प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और रक्षा प्रदर्शनियों के लिए सभी तरह के रक्षा सामान के निर्यात में भी हितधारक परामर्श की आवश्यकता नहीं होगी। इससे कंपनियों को विदेशी कारोबार के अवसरों पर तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
तीन ओजीईएल एसओपी को मिलाकर बनाई एक व्यवस्था
सरकार ने ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) व्यवस्था को भी सरल बनाया है। ओजीईएल के तहत पात्र कंपनियों को तय रक्षा सामान की कई खेपों के निर्यात के लिए बार-बार अलग-अलग मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होती।
पहले प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म और उपकरण, कलपुर्जों एवं घटकों तथा कंपनियों के बीच तकनीक हस्तांतरण से जुड़े तीन अलग-अलग ओजीईएल एसओपी लागू थे। अब इन तीनों को मिलाकर एकीकृत ओजीईएल एसओपी बनाई गई है। इससे निर्यातकों को एक समान और सरल नियमों के तहत काम करने की सुविधा मिलेगी।
ओजीईएल की वैधता दो से बढ़ाकर तीन साल
सरकार ने ओजीईएल की वैधता अवधि भी दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी है। इससे कंपनियों को बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण कराने की जरूरत कम होगी और अनुपालन से जुड़ी लागत तथा समय की बचत होगी।
ओजीईएल के तहत निर्यात किए जा सकने वाले देशों का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले यह सुविधा 41 देशों तक सीमित थी, जिसे अब बढ़ाकर सभी देशों तक किया गया है। हालांकि नकारात्मक या संवेदनशील देशों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध या हथियार प्रतिबंध झेल रहे देशों को इससे बाहर रखा गया है।
विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं के साथ समझौते वाली कंपनियों को भी राहत
नई व्यवस्था में विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (एफओईएम) के साथ लंबे समय के अनुबंध या समझौते वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। निर्धारित शर्तें पूरी करने पर ऐसे भारतीय निर्यातकों को संबंधित एफओईएम और पात्र सामान के लिए ओजीईएल दिया जा सकेगा। इसकी वैधता संबंधित अनुबंध या समझौते की अवधि के अनुरूप रखी जा सकेगी।
संशोधित व्यवस्था में छोटे कैलिबर के हथियारों के कुछ निर्धारित कलपुर्जों और घटकों तथा सुरक्षा उपकरणों के नागरिक उपयोग के लिए निर्यात की भी अनुमति दी गई है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए वैध अंतरराष्ट्रीय कारोबारी अवसरों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।
संवेदनशील मामलों में सुरक्षा प्रावधान बरकरार
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन सुधारों का उद्देश्य निर्यात नियमों को पूरी तरह ढीला करना नहीं, बल्कि नियमित और कम जोखिम वाले मामलों में अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाना है। संवेदनशील रक्षा सामान, महत्वपूर्ण तकनीक और संवेदनशील देशों से जुड़े निर्यात के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय पहले की तरह लागू रहेंगे।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रक्षा उत्पादन और निर्यात
ये सुधार ऐसे समय किए गए हैं जब भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सरकार के इन नए कदमों से भारतीय रक्षा उद्योग की वैश्विक पहुंच और निर्यात क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।