फर्जी एडल्ट ऐप्स के जाल पर Meta का बड़ा एक्शन, Facebook-Instagram से हटाए 39 खतरनाक विज्ञापन

नई दिल्ली। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी एडल्ट ऐप्स को बढ़ावा देने वाले दर्जनों विज्ञापनों पर मेटा ने कार्रवाई की है। कंपनी ने ऐसे कम से कम 39 विज्ञापनों को हटा दिया है, जिनके जरिए यूजर्स को अश्लील कंटेंट का लालच देकर फर्जी वेबसाइटों पर भेजा जा रहा था। इन वेबसाइटों पर यूजर्स को खतरनाक एंड्रॉयड ऐप की APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने मेटा को ऐसे विज्ञापनों के जरिए फैल रहे स्कैम और मैलवेयर के खतरे को लेकर चेतावनी दी थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एडवाइजरी में नाइट प्ले, रीलूप, किस, विमो, रिवो, नेक्सो और विक्सा जैसे ऐप्स के नाम शामिल थे। सरकार ने यह भी चेतावनी दी थी कि इनके दूसरे वेरिएंट का इस्तेमाल भी मैलवेयर फैलाने के लिए किया जा सकता है।

अश्लील कंटेंट का लालच, फिर APK डाउनलोड का खेल

इन विज्ञापनों में अश्लील वीडियो और आकर्षक थंबनेल का इस्तेमाल किया जा रहा था। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को ऐसी वेबसाइटों पर पहुंचाया जाता था, जहां सैकड़ों अश्लील वीडियो उपलब्ध होने का दावा किया जाता था। इसके बाद वीडियो देखने या कंटेंट एक्सेस करने के नाम पर यूजर्स से आधिकारिक ऐप स्टोर के बजाय सीधे APK फाइल डाउनलोड करने को कहा जाता था।

रॉयटर्स के अनुसार, एक विज्ञापन में यूजर्स को ‘मोवेक्सा.एपीके’ नाम की फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा गया था। इस तरह की APK फाइलें फोन में खतरनाक मैलवेयर इंस्टॉल कर सकती हैं।

OTP और बैंक पिन तक पहुंचने का खतरा

भारत सरकार ने चेतावनी दी है कि ऐसे मैलवेयर ऐप स्मार्टफोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक चोरी-छिपे पहुंच बना सकते हैं। इनके जरिए OTP, बैंक पिन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। कुछ ऐप अपडेट के नाम पर अतिरिक्त खतरनाक पैकेज डाउनलोड कर सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में यूजर का इंटरनेट ट्रैफिक हमलावरों के सर्वर से गुजारने के लिए VPN भी इंस्टॉल किया जा सकता है।

Accessibility परमिशन से बढ़ सकता है खतरा

सरकार के मुताबिक, ऐसे मैलवेयर का खतरा तब और गंभीर हो जाता है जब संदिग्ध ऐप फोन की Accessibility परमिशन मांगता है। यह सुविधा मूल रूप से दिव्यांग यूजर्स की सहायता के लिए बनाई गई है, लेकिन इसका दुरुपयोग होने पर मैलवेयर फोन पर काफी हद तक नियंत्रण हासिल कर सकता है।

इससे हमलावर यूजर की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ-साथ वित्तीय धोखाधड़ी को भी अंजाम दे सकते हैं। कुछ खतरनाक ऐप फोन की सेटिंग्स में बदलाव कर खुद को अनइंस्टॉल होने से रोकने की कोशिश भी कर सकते हैं।

सरकार ने यूजर्स को किया अलर्ट

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया विज्ञापनों, संदिग्ध वेबसाइटों या अनजान लिंक के जरिए APK फाइल डाउनलोड न करें। किसी भी ऐप को केवल Google Play Store या किसी भरोसेमंद ऐप स्टोर से ही इंस्टॉल करने की सलाह दी गई है।

अगर कोई संदिग्ध ऐप डिलीट नहीं हो रहा है या फोन रीस्टार्ट करने के बाद दोबारा दिखाई देता है, तो जरूरी डेटा का बैकअप लेने के बाद फोन को फैक्टरी रीसेट करने की सलाह दी गई है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के बाद हटाए गए विज्ञापन

रॉयटर्स ने भारत सरकार की एडवाइजरी जारी होने के बाद भी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे कम से कम 39 विज्ञापन चलते हुए पाए। इनमें से कई विज्ञापनों में अश्लील वीडियो के थंबनेल का इस्तेमाल किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, रॉयटर्स द्वारा मेटा से संपर्क किए जाने के तुरंत बाद कंपनी ने इन विज्ञापनों को हटा दिया। हालांकि, इस मामले में मेटा ने रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया।

मेटा की विज्ञापन नीतियों में वयस्क नग्नता और यौन गतिविधियों वाले विज्ञापनों पर रोक है। इसके अलावा यूजर्स को धोखा देने या उनसे पैसे ठगने के उद्देश्य से चलाए जाने वाले विज्ञापन भी प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापनों का सामने आना प्लेटफॉर्म की विज्ञापन निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

रॉयटर्स के अनुसार, भारत सरकार की चेतावनी के बाद मेटा द्वारा इस तरह के विज्ञापनों को हटाए जाने की यह पहली रिपोर्ट है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में 2025 के दौरान साइबर फ्रॉड के कारण लोगों को करीब 2.4 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।

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