बच्चों की पढ़ाई होगी आसान, पहली से आठवीं तक की पुस्तकें 22 भाषाओं में तैयार

नई दिल्ली। देश में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक की पाठ्यपुस्तकों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही अलग-अलग भारतीय भाषाओं में 121 प्रारंभिक भाषा सामग्री भी विकसित की जा रही है, जिनमें 93 जनजातीय भाषाएं शामिल हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के 66वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एनसीईआरटी के प्रयासों की सराहना की।

अपनी भाषा में पढ़ सकेंगे बच्चे

जोशी ने कहा कि स्थानीय और मातृभाषाओं में शैक्षिक सामग्री तैयार होने से बच्चों को अपनी भाषा में सीखने का अवसर मिलेगा। इससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने स्कूली शिक्षा में व्यापक सुधारों की मजबूत नींव रखी है। अब शिक्षा में केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय बच्चों के समग्र विकास, रचनात्मकता, तार्किक सोच, अनुभव आधारित शिक्षा और दक्षता आधारित सीखने पर जोर दिया जा रहा है।

एआई और डिजिटल शिक्षा पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एनसीईआरटी को अपने शोध तंत्र को मजबूत करने के साथ तकनीक का बेहतर उपयोग करना होगा।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पारंपरिक विषयों के साथ डिजिटल साक्षरता, एआई की समझ, समस्या समाधान, तार्किक सोच और नवाचार जैसे कौशलों से भी लैस करना जरूरी है।

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान

जोशी ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि पाठ्यक्रम में उचित बदलाव, मनो-सामाजिक सहायता और शिक्षकों के प्रशिक्षण के माध्यम से बच्चों के मानसिक कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

रोबोटिक्स सेंटर और अनुवाद प्रयोगशाला का उद्घाटन

समारोह के दौरान शिक्षा मंत्री ने एनसीईआरटी में कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें रोबोटिक्स लर्निंग सेंटर, अनुवाद प्रयोगशाला और उन्नत टेलीविजन स्टूडियो शामिल हैं। इन सुविधाओं से तकनीक आधारित शिक्षा, भारतीय भाषाओं में शैक्षिक सामग्री और नए डिजिटल शैक्षिक कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि छह दशकों से अधिक के अनुभव के आधार पर एनसीईआरटी को बदलती शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ना होगा और इसे अधिक नवाचारी, समावेशी, शोध आधारित तथा भविष्य के लिए तैयार संस्थान बनाने की दिशा में काम करना होगा।

कार्यक्रम में भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष डॉ. चामू कृष्ण शास्त्री, एनसीईआरटी के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी सहित शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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