दुर्ग। शासकीय वी.वाई.टी. पीजी स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के जूलॉजी विभाग द्वारा IQAC एवं IIC के बैनर तले तथा RUSA के प्रायोजन में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला “डेटा विश्लेषण और बौद्धिक संपदा अधिकार” के दूसरे दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधुनिक उपयोग और साइबर सुरक्षा को लेकर विशेष विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। दोनों सत्रों में विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
AI के जरिए शोध और डेटा विश्लेषण को प्रभावी बनाने की जानकारी
पहले विशेषज्ञ सत्र में “एआई एज” विषय पर आईबीएस, तेलंगाना के मुख्य प्रबंधक संजय आशाटकर ने शोध एवं डेटा विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आधुनिक AI टूल्स के व्यावहारिक उपयोग, शोध कार्य में इसकी संभावनाओं और डेटा विश्लेषण को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि AI आधारित टूल्स का सही और जिम्मेदार तरीके से उपयोग शोध एवं डेटा आधारित कार्यों को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।
फिशिंग, OTP और बैंकिंग फ्रॉड से बचाव के बताए तरीके
दूसरे सत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर विशेष विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। रेंज साइबर थाना, दुर्ग के टाउन इंस्पेक्टर श्री पुष्पेंद्र भट्ट एवं सहायक उप निरीक्षक डॉ. यशवंत श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव के विभिन्न उपाय बताए।
विशेषज्ञों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, OTP एवं बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया सुरक्षा, साइबर बुलिंग, फर्जी लिंक तथा व्यक्तिगत और डिजिटल डेटा की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। डिजिटल लेन-देन के दौरान सतर्कता बरतने और साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल उचित माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
सवाल-जवाब के जरिए दूर की विद्यार्थियों की जिज्ञासाएं
दोनों विशेषज्ञ सत्र संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक रहे। विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समाधान किया। वास्तविक जीवन की घटनाओं और उदाहरणों के माध्यम से AI के प्रभावी उपयोग, साइबर जागरूकता, डिजिटल जिम्मेदारी और सुरक्षित तकनीकी व्यवहार को समझाया गया।
कार्यशाला के सत्र का समन्वय शोधार्थी सुश्री पूजा यादव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापक श्री अनुराग मिश्रा एवं श्री सुदेश साहू ने प्रस्तुत किया। आयोजन को सफल बनाने में जूलॉजी विभाग की डॉ. नीरू अग्रवाल, डॉ. मौसमी डे एवं डॉ. अलका मिश्रा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
19 सितंबर को होगा कार्यशाला का अंतिम दिन
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में जूलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक डॉ. दिव्या के. मिंज तथा विभागीय टीम द्वारा कार्यशाला का संचालन किया जा रहा है। कार्यशाला का तीसरा एवं अंतिम दिवस 19 सितंबर 2026 को आयोजित होगा, जिसमें “डेटा विश्लेषण” विषय पर विशेषज्ञ सत्र होंगे।