दुर्ग। हर विवाद का समाधान केवल अदालत के आदेश से ही हो, यह जरूरी नहीं है। कई मामलों में बातचीत, आपसी समझ और समय पर शुरू किया गया संवाद लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी सोच को मजबूत करने के उद्देश्य से मीडिएशन 3.0 को प्रभावी बनाने की दिशा में दुर्ग में मीडिएटर अधिवक्ताओं एवं एडवोकेट मीडिएटर्स की विशेष बैठक आयोजित की गई।
माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग के मार्गदर्शन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के सभागार में आयोजित बैठक में मीडिएशन 3.0 के तहत अधिक से अधिक प्रकरणों को संवाद, सहमति और मध्यस्थता के माध्यम से समाधान की ओर ले जाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य संदेश रहा—“विवाद बढ़ाना नहीं, समाधान तक पहुंचना है।”
तीन चरणों में चलेगा मीडिएशन 3.0 अभियान
मीडिएशन 3.0 को तीन चरणों में संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में ऐसे प्रकरणों की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता के लिए रेफर करने पर जोर दिया जा रहा है। दूसरे चरण में पक्षकारों के बीच संवाद और समझौते की प्रक्रिया होगी। अंतिम चरण में हुए समझौतों के सत्यापन और प्रकरणों के समापन की कार्रवाई की जाएगी।
- Stage I – Identification & Referral: 1 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक
- Stage II – Mediation & Settlement: 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक
- Stage III – Settlement, Verification & Closure: 1 दिसंबर से 31 दिसंबर 2026 तक
इन तीनों चरणों का उद्देश्य विवादों को संघर्ष से संवाद और मुकदमे से समाधान की दिशा में ले जाना है।
पक्षकार स्वयं बनते हैं समाधान का हिस्सा
मध्यस्थता प्रक्रिया की खासियत यह है कि इसमें समाधान केवल किसी एक पक्ष पर थोपा नहीं जाता, बल्कि दोनों पक्ष आपसी बातचीत और सहमति के माध्यम से समाधान तक पहुंचते हैं। इससे कानूनी विवाद के समाधान के साथ कई मामलों में आपसी संबंधों को भी बेहतर बनाने का अवसर मिल सकता है।
मध्यस्थता के दौरान पक्षकारों को निर्धारित अवधि में मीडिएशन सेंटर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग अथवा संबंधित न्यायालय से संपर्क कर मीडिएशन 3.0 का लाभ लेने की जानकारी दी जा रही है।
जनजागरूकता पर भी जोर
मीडिएशन 3.0 को प्रभावी बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि हर विवाद का समाधान लंबी कानूनी लड़ाई से ही हो, यह जरूरी नहीं है। समय पर शुरू किया गया संवाद भी समाधान का रास्ता खोल सकता है।
मीडिएशन 3.0 के माध्यम से “Argument से पहले Conversation और Conflict से पहले Mediation” की सोच को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ जहां संभव हो, पक्षकारों को स्वयं आपसी सहमति से विवाद का समाधान तलाशने का अवसर उपलब्ध कराना है।