अल-नीनो का असर: सर्दी होगी कम, 2027 की गर्मी बढ़ा सकती है चिंता

नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में समुद्र के बढ़ते तापमान ने आने वाले मौसम को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। अल-नीनो की स्थिति मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं, जिसका असर 2026-27 की सर्दियों के दौरान भारत समेत कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री तापमान सामान्य स्तर से 1 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ चुका है। अगर अल-नीनो और ताकतवर होता है, तो इस बार कई इलाकों में सर्दी सामान्य से कम पड़ सकती है और इसके बाद 2027 की गर्मी पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

अल-नीनो उस स्थिति को कहा जाता है, जब प्रशांत महासागर के समुद्री पानी का तापमान सामान्य से काफी अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण वैश्विक स्तर पर मौसम के पैटर्न में बदलाव देखने को मिलता है। भारत में इसका असर मॉनसून, बारिश और तापमान पर पड़ सकता है। इस बार चिंता इसलिए भी अधिक है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान पहले से ही ऊंचे स्तर पर है।

सर्दी में कितना बढ़ सकता है तापमान?

अल-नीनो के कारण हर शहर का तापमान एक निश्चित संख्या में बढ़ेगा, ऐसा नहीं है। स्थानीय मौसम, ठंडी हवाएं, बादल और अन्य मौसमी प्रणालियां भी तापमान को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी समय दिल्ली का सामान्य तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहता है और तापमान सामान्य से 2 डिग्री अधिक रहता है, तो यह करीब 12 डिग्री तक पहुंच सकता है।

इसी तरह किसी ऐसे क्षेत्र में जहां तापमान शून्य से 3 डिग्री नीचे रहता है, वहां यह शून्य से 1 डिग्री नीचे के आसपास रह सकता है। हालांकि, अभी दिल्ली, चूरू, पटना, श्रीनगर या लद्दाख जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के लिए किसी निश्चित तापमान की भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी।

दिल्ली, चूरू और पटना में कम महसूस हो सकती है ठंड

दिल्ली और पटना जैसे मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने पर सर्दी अपेक्षाकृत कम महसूस हो सकती है। खासकर रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। राजस्थान के चूरू जैसे इलाकों में भी कुछ रातें सामान्य की तुलना में कम ठंडी रह सकती हैं।

श्रीनगर और लद्दाख में भी असर संभव

श्रीनगर और लद्दाख जैसे ठंडे क्षेत्रों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है, हालांकि यहां बदलाव कितना होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ऊंचाई और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लद्दाख में तापमान में काफी अंतर देखने को मिलता है।

2027 की गर्मी बढ़ा सकती है परेशानी

अल-नीनो का प्रभाव केवल सर्दी तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक मार्च से मई 2027 के बीच गर्मी अधिक तेज हो सकती है। मजबूत अल-नीनो की स्थिति भारत में मॉनसून को प्रभावित कर सकती है, जिससे बारिश कमजोर या असमान रहने की आशंका बन सकती है।

अगर तापमान ज्यादा बढ़ता है और बारिश सामान्य से कम रहती है, तो पानी की उपलब्धता, खेती और आम जनजीवन पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा गर्मी के मौसम में लू की स्थिति भी अधिक परेशान कर सकती है।

अल-नीनो की तीव्रता पर नजर

प्रशांत महासागर के निनो 3.4 क्षेत्र के समुद्री तापमान को अल-नीनो की तीव्रता के आकलन में महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों में तापमान में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है और कुछ अनुमानों में इसके और बढ़ने की संभावना जताई गई है। हालांकि, भविष्य में तापमान किस स्तर तक पहुंचेगा, इसे लेकर अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

मौसम वैज्ञानिक लगातार समुद्र और वायुमंडल से जुड़े आंकड़ों की निगरानी कर रहे हैं। अल-नीनो की स्थिति में दिन-प्रतिदिन उतार-चढ़ाव भी हो सकता है, इसलिए आने वाले महीनों के आंकड़े भारत के मौसम पर इसके संभावित प्रभाव को समझने में महत्वपूर्ण होंगे।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग असर

अल-नीनो का प्रभाव दुनिया के सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं होता। अमेरिका के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्म परिस्थितियां बन सकती हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में बर्फबारी बढ़ सकती है। दक्षिण अमेरिका के पेरू और चिली में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, जबकि मध्य अमेरिका और कैरेबियन के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति बन सकती है।

ऑस्ट्रेलिया में भी सूखे का खतरा बढ़ सकता है। एशिया के कई हिस्सों में बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में भी वर्षा प्रभावित होने की संभावना रहती है।

भारत के लिए क्यों अहम है अल-नीनो?

भारत के लिए अल-नीनो इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका संबंध अक्सर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में बदलाव से जोड़ा जाता है। यदि मॉनसून कमजोर रहता है तो बारिश पर निर्भर खेती, जल संसाधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, अल-नीनो अकेला ऐसा कारक नहीं है जो भारत के मौसम को तय करता है। इसलिए 2027 में बारिश, गर्मी और लू की वास्तविक स्थिति का आकलन आने वाले महीनों में नए मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर ही अधिक स्पष्ट हो सकेगा।

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