स्कूलों के बाहर जंक फूड पर लगेगी लगाम! किराना दुकानों से कंपनियों तक बढ़ेगी सख्ती

नई दिल्ली। बच्चों में बढ़ते मोटापे और अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों को देखते हुए केंद्र सरकार स्कूलों के आसपास बिकने वाले हाई फैट, हाई साल्ट और हाई शुगर (HFSS) खाद्य पदार्थों पर सख्ती की तैयारी कर रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) देशभर के स्कूलों के आसपास 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री और उनके विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटा है।

प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद इसका असर स्कूलों के आसपास संचालित किराना दुकानों, रेस्टोरेंट, ठेले-खोमचे और अन्य खाद्य विक्रेताओं के साथ-साथ पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थ बनाने वाली बड़ी कंपनियों पर भी पड़ सकता है।

किन खाद्य पदार्थों पर लग सकती है रोक?

नए प्रस्ताव के तहत ऐसे खाद्य उत्पाद दायरे में आ सकते हैं, जिनमें निर्धारित सीमा से अधिक फैट, नमक या चीनी मौजूद होगी। इनमें पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, समोसा, कचौड़ी जैसे फास्ट फूड के अलावा नमकीन, चिप्स और अन्य पैक्ड स्नैक्स शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा ज्यादा चीनी वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स, कार्बोनेटेड पेय, चॉकलेट और कुछ मिठाइयां भी प्रस्तावित नियमों के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि, किसी खास उत्पाद पर रोक उसकी पोषण संरचना और तय मानकों के आधार पर लागू होगी।

FSSAI के CEO रजित पुन्हानी के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही बेहतर खान-पान की आदतों की ओर प्रेरित करना है। उनके अनुसार, दुकानदार स्कूलों के आसपास स्वास्थ्यवर्धक और निर्धारित मानकों वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री जारी रख सकेंगे।

6 अक्टूबर तक मांगे गए सुझाव

FSSAI ने फैट, नमक और चीनी की सीमा से संबंधित ड्राफ्ट जारी किया है। इस पर 6 अक्टूबर 2026 तक आम लोगों और संबंधित हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर नियमों को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बच्चों में तेजी से बढ़ रहा मोटापे का आंकड़ा

वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 5 से 19 वर्ष की उम्र के बच्चों में अधिक वजन और मोटापे की समस्या लगातार बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2015 में ऐसे बच्चों की संख्या करीब 2.8 करोड़ थी, जो 2025-26 में बढ़कर 4.1 करोड़ से अधिक हो गई।

अनुमानों के मुताबिक, यदि वृद्धि की यही रफ्तार जारी रहती है तो 2040 तक भारत में मोटापे से प्रभावित बच्चों की संख्या करीब 5.6 करोड़ तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञ बच्चों के बीच पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और फास्ट फूड की बढ़ती लोकप्रियता को इस समस्या से जुड़े प्रमुख कारकों में गिनाते हैं।

महाराष्ट्र में पहले से कार्रवाई

केंद्र के प्रस्तावित कदम से पहले महाराष्ट्र में स्कूलों के आसपास ऐसे खाद्य उत्पादों को लेकर कार्रवाई शुरू हो चुकी है। राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे के अनुसार, स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में संबंधित उत्पादों को लेकर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जा रही है।

राज्य के आंकड़ों के अनुसार, खाद्य निरीक्षकों ने अब तक 133 दुकानों में उल्लंघन पाया है, जबकि 51 दुकानों को कारोबार बंद करने के आदेश दिए गए हैं।

दुकानदारों और खाद्य उद्योग की अलग-अलग चिंताएं

प्रस्तावित नियमों को लेकर कुछ दुकानदारों और खाद्य उद्योग से जुड़े संगठनों ने व्यावहारिक दिक्कतों की ओर भी ध्यान दिलाया है। कुछ कारोबारियों का कहना है कि स्कूलों के आसपास ऐसे उत्पादों की बिक्री रुकने से उनकी रोजाना की आय प्रभावित हो सकती है।

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन फूड ट्रेड एंड इंडस्ट्री का कहना है कि देश में कई स्कूल व्यस्त बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच स्थित हैं। ऐसे में स्कूल से 50 मीटर की सीमा को जमीन पर लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित नियम प्रभावी तरीके से लागू होते हैं तो इससे खाद्य कंपनियों पर अपने उत्पादों में नमक, चीनी और वसा की मात्रा कम करने का दबाव बढ़ सकता है। चिली और मेक्सिको जैसे देशों में लागू किए गए उपायों का भी इस संदर्भ में उदाहरण दिया जा रहा है।

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