Bhadrapada Purnima 2026 : सनातन धर्म में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। वर्ष 2026 में भाद्रपद पूर्णिमा का पर्व 26 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान सत्यनारायण और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
भाद्रपद पूर्णिमा का शुभ समय
भाद्रपद पूर्णिमा की तिथि 25 सितंबर की रात 11:07 बजे शुरू होगी और 26 सितंबर की रात 10:19 बजे समाप्त होगी। सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय भी पूजा और व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
| विवरण | समय |
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 25 सितंबर, रात 11:07 बजे |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 26 सितंबर, रात 10:19 बजे |
| सूर्योदय | सुबह 6:20 बजे |
| सूर्यास्त | शाम 6:15 बजे |
| चंद्रोदय | शाम 6:00 बजे |
| चंद्रास्त | 27 सितंबर, सुबह 6:39 बजे |
हालांकि, व्रत और पूजा के दौरान कुछ नियमों का पालन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खान-पान, व्यवहार और पूजा-पद्धति में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
तामसिक भोजन और क्रोध से बचें
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से परहेज किया जाता है। घर में सात्विक वातावरण बनाए रखने की सलाह दी जाती है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को किसी के प्रति द्वेष या कटुता रखने से भी बचना चाहिए।
इस दिन क्रोध करने, अपशब्द बोलने या किसी का अपमान करने से बचने की मान्यता है। खासकर घर के बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद लोगों के प्रति सम्मान का भाव रखने की सलाह दी जाती है।
पूजा-पाठ से जुड़ी इन बातों का रखें ध्यान
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान गंदे या मैले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। भोजन तैयार करने से पहले भी स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
घर के मुख्य द्वार को साफ रखना और शाम के समय वहां पर्याप्त रोशनी रखना भी शुभ माना जाता है। अगर कोई जरूरतमंद या साधु-संत घर के दरवाजे पर आए तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देने की परंपरा है। पूजा केवल दिखावे के लिए करने के बजाय श्रद्धा और भक्तिभाव से करने की सलाह दी जाती है।
तुलसी से जुड़े नियमों का रखें ध्यान
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन तुलसी के पौधे को लेकर भी कुछ धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। बिना स्नान किए तुलसी के पत्तों को छूने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी तरह सूर्यास्त के बाद तुलसी दल नहीं तोड़ने की परंपरा है।
तुलसी में जल चढ़ाते समय भी स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। पौधे को अत्यधिक पानी देने से बचें और बिना आवश्यकता तुलसी के पत्ते न तोड़ें। तुलसी दल लेते समय हाथ साफ रखने की परंपरा बताई गई है।
श्रद्धा और सात्विकता का रखें ध्यान
भाद्रपद पूर्णिमा के व्रत में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुद्धता, संयम और सकारात्मक व्यवहार को महत्व दिया जाता है। इसलिए इस दिन पूजा-पाठ के साथ अपने आचरण में भी शांति और सम्मान का भाव बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इनके परिणामों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या परंपरा का पालन स्थानीय मान्यताओं और अपनी श्रद्धा के अनुसार करें।