लखनऊ। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा देने के बाद पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ने के बजाय सीधे जनता के बीच जाकर काम करना चाहती हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पहल को आम लोगों से जुड़े मुद्दों और न्याय की आवाज उठाने से जोड़ा है।
व्यवस्था और प्रशासन पर उठाए सवाल
दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान सामने आए कुछ अनुभवों का जिक्र करते हुए व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने मिर्जापुर के लहुरिया दह क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि एक महिला ने गांव में आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल की मांग की थी। उनके अनुसार, स्कूल की स्वीकृति के बावजूद लंबे समय तक उसका निर्माण नहीं हो सका।
उन्होंने राजस्व विभाग में तैनाती के दौरान एक भूमिहीन व्यक्ति की जमीन से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। दिव्या मित्तल ने कहा कि कई बार अधिकारियों को फैसले लेने में ऊपर से आने वाले निर्देशों का सामना करना पड़ता है।
युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों का किया जिक्र
पूर्व IAS अधिकारी ने अपने संदेश में सड़क, पुल, पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी में वर्षों लगाने वाले युवाओं का समय पेपर लीक और कानूनी प्रक्रियाओं में निकल जाता है। उन्होंने AI और बदलती तकनीक के दौर में युवाओं के भविष्य और रोजगार को लेकर भी चर्चा की जरूरत बताई।
उत्तर प्रदेश से राजनीतिक सफर शुरू करने की बात
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक गतिविधियों की शुरुआत का केंद्र बताया। उन्होंने देवरिया में चलाए गए ‘ऑपरेशन कब्जा मुक्ति’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जनभागीदारी से कई मुश्किल काम पूरे किए जा सकते हैं।
फिलहाल उन्होंने किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। वहीं, उनके मिर्जापुर से चुनाव लड़ने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जरूर सामने आ रही हैं, हालांकि चुनाव लड़ने की सीट या उम्मीदवारी को लेकर उनकी ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।