नई दिल्ली। साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए तकनीक का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। फर्जी लिंक, एसएमएस और ई-मेल के बाद अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से आवाज की हूबहू नकल कर ठगी करने का तरीका सामने आया है। जालसाज किसी रिश्तेदार, दोस्त या परिचित की आवाज जैसी आवाज तैयार कर फोन कर सकते हैं और अचानक आर्थिक मदद की जरूरत बताकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बना सकते हैं।
इंटरनेट पर मौजूद आवाज से तैयार हो सकता है क्लोन
AI वॉइस क्लोनिंग में ठग सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो या ऑडियो का सहारा ले सकते हैं। किसी व्यक्ति की आवाज का सैंपल मिलने के बाद AI आधारित तकनीक से उसी तरह की आवाज तैयार की जा सकती है। इसके बाद इस आवाज को फोन कॉल या वॉइस मैसेज में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इमरजेंसी की कहानी बनाकर कर सकते हैं जल्दबाजी
ऐसे मामलों में साइबर ठग कॉल करके खुद को आपका परिचित बताते हुए अचानक पैसे की जरूरत की बात कर सकते हैं। दुर्घटना, अस्पताल, कानूनी परेशानी या किसी जरूरी भुगतान का हवाला देकर तुरंत रकम भेजने के लिए कहा जा सकता है।
ऐसी स्थिति में केवल आवाज पहचानकर भरोसा करने के बजाय कॉलर की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। किसी दूसरे नंबर पर संबंधित व्यक्ति को फोन करें या परिवार के किसी सदस्य से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की जानकारी लें।
पैसे भेजने से पहले दोबारा जांच जरूरी
यदि कोई व्यक्ति फोन पर तत्काल भुगतान के लिए दबाव बना रहा है तो बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर न करें। बैंक खाते का नाम, खाता नंबर और भुगतान का उद्देश्य अच्छी तरह जांचें। कॉल करने वाला यदि पहचान की पुष्टि से बच रहा हो या लगातार जल्दबाजी कर रहा हो तो इसे संभावित धोखाधड़ी का संकेत मानकर सावधानी बरतें।
साइबर फ्रॉड होने पर 1930 पर करें शिकायत
अगर किसी व्यक्ति के साथ वित्तीय साइबर ठगी हो जाती है और पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं, तो तुरंत बैंक से संपर्क करने के साथ साइबर अपराध की शिकायत करनी चाहिए। भारत में वित्तीय साइबर फ्रॉड के लिए 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
इसके अलावा शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की जा सकती है। संदिग्ध संचार या मैसेज मिलने पर संबंधित सरकारी संचार सेवाओं के माध्यम से रिपोर्ट करने का विकल्प भी उपलब्ध है।
सबसे जरूरी बात यह है कि आवाज सुनकर ही किसी व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित न मानें। अचानक पैसे की मांग होने पर पहले स्वतंत्र तरीके से पुष्टि करें और उसके बाद ही कोई वित्तीय लेनदेन करें।