दुर्ग। केंद्रीय जेल दुर्ग में बंदियों के अधिकारों, विधिक सहायता और जेल की व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर ने निरीक्षण किया। इस दौरान न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल, खासकर ‘न्यायश्रुति’ और ‘ई-साक्ष्य’ की प्रभावी व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान बंदियों को मिलने वाली विधिक सहायता, स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, स्वच्छता, प्रकरणों की स्थिति, पुनर्वास और उनके आश्रित परिवारों से जुड़े विषयों की जानकारी ली गई। अधिकारियों से कहा गया कि न्यायिक प्रक्रिया से संबंधित जानकारी बंदियों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचनी चाहिए।
डिजिटल न्यायिक प्रक्रिया पर फोकस
निरीक्षण के दौरान न्यायश्रुति और ई-साक्ष्य के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। न्यायश्रुति के जरिए न्यायिक कार्यवाही और साक्ष्य से जुड़ी प्रक्रियाओं तथा ई-साक्ष्य के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल साक्ष्यों के न्यायालयीन उपयोग की जानकारी पर चर्चा की गई।
सजायाफ्ता बंदियों के अपील संबंधी मामलों को अद्यतन रखने और उन्हें उनके प्रकरण की वर्तमान स्थिति की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए। नए बंदियों को उनके मामलों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के तरीकों के बारे में बताया गया। निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई।
बंदियों के परिवारों की समस्याओं पर भी नजर
निरीक्षण के दौरान NALSA की SPRUHA Scheme 2025 के तहत बंदियों के आश्रित परिवारों की स्थिति को लेकर भी जानकारी ली गई। बंदियों की पत्नी, बच्चों और वृद्ध माता-पिता के सामने आने वाली आर्थिक, सामाजिक और व्यवहारिक समस्याओं के बारे में चर्चा की गई।
आजीविका, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, भरण-पोषण और दैनिक जरूरतों से संबंधित समस्याओं की पहचान कर पात्र परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
PLV के जरिए परिवारों तक पहुंचेगी सहायता
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने पैरा लीगल वालेंटियर्स (PLVs) को आश्रित परिवारों का फील्ड स्तर पर सत्यापन करने और उनकी वास्तविक जरूरतों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए। संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर पात्र परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
स्वास्थ्य और पुनर्वास को प्राथमिकता
निरीक्षण के दौरान ऐसे बंदियों की जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, जो परिहार का लाभ लेने के पात्र हैं और जिनके आवेदन लंबित हैं।
अधिकारियों को बंदियों की मानवीय गरिमा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, विधिक सहायता और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं पर लगातार ध्यान देने के निर्देश दिए गए। साथ ही उच्चतम न्यायालय के शंकर महतो प्रकरण में दिए गए सिद्धांतों एवं दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, जेल अधीक्षक सहित जेल प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।