दुर्ग। न्यायालयीन प्रक्रियाओं को तकनीक से जोड़ने की दिशा में दुर्ग जिला न्यायालय ने एक अहम पहल की है। अब समंस की प्रक्रिया को भी डिजिटल माध्यम से अधिक तेज, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी है। इसी उद्देश्य से जिला न्यायालय के सभी कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली के उपयोग का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
यह प्रशिक्षण प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग श्री के. विनोद कुजूर के मुख्य मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य पारंपरिक तरीके से जारी होने वाले समंस की प्रक्रिया को डिजिटल तकनीक से जोड़ना और उसकी पूरी प्रक्रिया को अधिक सुगम एवं ट्रैक करने योग्य बनाना रहा।
श्री प्रशांत पाराशर, द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग के मार्गदर्शन में श्री रवि कुमार महोबिया, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, दुर्ग ने कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली का विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रस्तुतीकरण और प्रायोगिक प्रदर्शन के माध्यम से प्रणाली के अलग-अलग चरणों की जानकारी दी गई।
समंस जारी करने से डिलीवरी तक होगी डिजिटल ट्रैकिंग
प्रशिक्षण के दौरान कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस तैयार करने, संबंधित पक्षकार या गवाह को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने और उसकी डिलीवरी की स्थिति ऑनलाइन देखने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके साथ ही डिजिटल डिलीवरी रिपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को सुरक्षित रखने की जानकारी भी दी गई।
ई-समंस प्रणाली से समंस भेजने से लेकर उसकी डिलीवरी तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। इससे पारंपरिक प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने और न्यायालयीन कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
प्रशिक्षण में कराया गया Hands-on Demonstration
यह प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रहा। कोर्ट मोहर्रिरों को ई-समंस प्रणाली का Hands-on Demonstration भी कराया गया, ताकि वे वास्तविक न्यायालयीन कार्य के दौरान इसका प्रभावी और सुचारु उपयोग कर सकें।
दुर्ग जिला न्यायालय की यह पहल न्यायिक व्यवस्था में हो रहे डिजिटल बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसके माध्यम से पारंपरिक फाइलों और दस्तावेजों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक संचार और ट्रैकिंग जैसी तकनीक को न्यायालयीन प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है।
ई-समंस प्रणाली के प्रभावी उपयोग से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीक-सक्षम बनाने में सहायता मिलेगी।