त्वचा रोगों के इलाज के लिए आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल, सोरायसिस और सफेद दाग समेत कई बीमारियों पर जारी किए दिशानिर्देश

नई दिल्ली। सोरायसिस, सफेद दाग और फंगल इंफेक्शन जैसी त्वचा संबंधी बीमारियों के उपचार को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कदम उठाया है। आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों के तहत इन रोगों की पहचान, रोकथाम और उपचार के लिए मानक दिशानिर्देश जारी किए हैं।

इस पहल का उद्देश्य मरीजों के इलाज में एकरूपता लाने, चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करने और साक्ष्यों पर आधारित उपचार पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। इन दिशानिर्देशों से चिकित्सकों को मरीजों की स्थिति के अनुसार उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दिशानिर्देशों में योग को भी मिली जगह

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा तैयार किए गए इन दिशानिर्देशों में योग को भी शामिल किया गया है। इन्हें अंतिम रूप देने से पहले दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के सहयोग से परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि साक्ष्यों पर आधारित चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने वाले ये दिशानिर्देश मरीजों की देखभाल में सुधार करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आयुष चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका मजबूत करने में सहायक होंगे।

क्या है सोरायसिस और कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?

सोरायसिस प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ी त्वचा की बीमारी है। इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके कारण त्वचा की नई कोशिकाएं तेजी से बनने लगती हैं और त्वचा पर कुछ खास लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • लाल धब्बे: त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते दिखाई दे सकते हैं।
  • सफेद या चांदी जैसी पपड़ी: प्रभावित हिस्से पर मोटी पपड़ी जम सकती है।
  • खुजली और जलन: त्वचा में खुजली, दर्द या जलन महसूस हो सकती है।

मरीजों के लिए क्यों अहम है यह पहल?

त्वचा रोगों की सही पहचान और समय पर उपचार मरीजों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयुष मंत्रालय के इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में उपचार संबंधी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना और चिकित्सकों को बेहतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।

हालांकि, किसी भी त्वचा रोग के लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। उपचार का चयन बीमारी की प्रकृति और मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।

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