नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के दौरान मां सरस्वती की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मां सरस्वती को ज्ञान, विद्या, बुद्धि, संगीत और कला की देवी कहा जाता है। विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक और कलाकार विशेष रूप से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल अक्टूबर में सरस्वती पूजा की तारीख को लेकर लोगों के बीच सवाल है कि पूजा 16 अक्टूबर को होगी या 17 अक्टूबर को।
17 अक्टूबर को होगी सरस्वती पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शारदीय नवरात्रि में सरस्वती पूजा दो चरणों में की जाती है। पहले दिन देवी का आवाहन किया जाता है और दूसरे दिन मुख्य पूजा होती है। वर्ष 2026 में सरस्वती आवाहन 16 अक्टूबर, शुक्रवार को होगा, जबकि मुख्य सरस्वती पूजा 17 अक्टूबर, शनिवार को की जाएगी।
सरस्वती आवाहन का शुभ मुहूर्त
16 अक्टूबर को मां सरस्वती के आवाहन का शुभ समय दोपहर 3:33 बजे से शाम 5:50 बजे तक बताया गया है। आवाहन का अर्थ देवी को पूजा के लिए आमंत्रित करना है। इस दौरान भक्त मां सरस्वती का ध्यान करते हैं और उनसे पूजा स्वीकार करने की प्रार्थना करते हैं।
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
17 अक्टूबर को मां सरस्वती की मुख्य पूजा का मुहूर्त दोपहर 3:32 बजे से शाम 5:49 बजे तक बताया गया है। इस दौरान मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता की कामना की जाती है। पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि कर लेना उचित रहेगा।
मां सरस्वती की पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान और विवेक की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उनकी आराधना से व्यक्ति को ज्ञान प्राप्ति, एकाग्रता और सही निर्णय लेने की प्रेरणा मिलती है। विद्यार्थी पढ़ाई में सफलता और शिक्षक व कलाकार अपने कार्यक्षेत्र में उन्नति की कामना से मां की पूजा करते हैं।
सरस्वती पूजा की सरल विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें।
- मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर को साफ चौकी पर स्थापित करें।
- मां को सफेद या पीले फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाकर अपनी किताबें, कॉपियां, कलम या संगीत से जुड़ी सामग्री पूजा स्थल पर रखें।
- मां सरस्वती के मंत्र का जाप करें और ज्ञान व बुद्धि की कामना करें।
- अंत में मां की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मां सरस्वती का मंत्र
पूजा के दौरान मां सरस्वती के इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।’
धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति के साथ मां सरस्वती की आराधना करने से ज्ञान और सद्बुद्धि की प्राप्ति की कामना की जाती है।
नोट: पूजा की तिथि और मुहूर्त की पुष्टि के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय विद्वान से सलाह लें।