दुर्ग में मध्यस्थता 3.0 कैंपस प्रतियोगिता आयोजित, संवाद और सहमति से न्याय पर जोर

दुर्ग। विवादों का समाधान केवल टकराव से ही नहीं, बल्कि संवाद, आपसी समझ और सहमति से भी संभव है। इसी संदेश को युवाओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से दुर्ग में मध्यस्थता 3.0 के अंतर्गत कैंपस मध्यस्थता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 100 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया और समूह व व्यक्तिगत स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय और शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (साइंस कॉलेज), दुर्ग के मनोविज्ञान विभाग का सहयोग रहा। महाविद्यालय के समान अवसर प्रकोष्ठ ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम में के. विनोद कुजूर ने कहा कि मध्यस्थता भारतीय सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद और आपसी समझ के माध्यम से मतभेदों का शांतिपूर्ण समाधान करने की संस्कृति अपनाने का आह्वान किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने भी मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान के महत्व पर प्रकाश डाला।

जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनीश दुबे ने ‘तारीख पर तारीख’ संवाद का उल्लेख करते हुए न्यायालयों में लंबित मामलों और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने लोक अदालतों और मध्यस्थता को विवादों के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को सक्रिय श्रवण, सहानुभूति, प्रभावी संवाद, तार्किक चिंतन और सहमति निर्माण जैसे कौशल सीखने का अवसर मिला।

प्रतियोगिता के परिणाम

समूह प्रतियोगिता

  • प्रथम: ग्रुप 8 — यामिनी बघेल, नीता साहू, आदित्य कुमार चंद्रपक्षी एवं मृणाल डप।
  • द्वितीय: ग्रुप 5 — कंचना कोषा, करुणा जैन, संध्या ठाकुर एवं अंजलि वर्मा।
  • तृतीय: ग्रुप 2 — श्रेया साहू, गरिमा साहू, ओमकुमारी एवं ध्यसंत साहू।

स्नातक (UG) व्यक्तिगत प्रतियोगिता

  • प्रथम: मृणाल डप
  • द्वितीय: तोशी
  • तृतीय: श्लोक

स्नातकोत्तर (PG) व्यक्तिगत प्रतियोगिता

  • प्रथम: आशा
  • द्वितीय: अंजलि
  • तृतीय: नीतू

कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकों, विद्यार्थियों, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारियों और पैरालीगल वॉलंटियर्स की उपस्थिति रही। आयोजन के माध्यम से युवाओं को विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान और सहमति आधारित न्याय के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

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