क्या सस्ती होगी चीनी? एथनॉल नीति में केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एथनॉल खरीद नीति में बदलाव किया है। नई व्यवस्था के तहत सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथनॉल की खरीद नहीं करेंगी। सरकार का उद्देश्य गन्ने का अधिक हिस्सा चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध कराना है, ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके और कीमतों में तेजी को नियंत्रित किया जा सके।

एथनॉल खरीद के लिए बदले नियम

तेल विपणन कंपनियों ने करीब 1,100 करोड़ लीटर एथनॉल खरीदने के लिए निविदा जारी की है। इसमें मक्का, टूटे अनाज, भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे जाने वाले अतिरिक्त चावल और सी-हेवी शीरे से बने एथनॉल की खरीद का प्रावधान रखा गया है। वहीं, गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथनॉल को खरीद से बाहर रखा गया है।

सी-हेवी शीरा चीनी उत्पादन के दौरान बचने वाला उप-उत्पाद है, जिसमें चीनी की मात्रा काफी कम होती है। इसके इस्तेमाल से चीनी की उपलब्धता पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है। इस बदलाव से स्पष्ट है कि सरकार एथनॉल कार्यक्रम को जारी रखते हुए उसके लिए वैकल्पिक कच्चे माल के इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहती है।

गन्ने की पैदावार घटने की आशंका

महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण फसल प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ क्षेत्रों में बाढ़, रोग और कीटों के प्रकोप से उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

देश में सालाना चीनी की खपत करीब 300 लाख टन बताई जाती है, जबकि इस वर्ष उत्पादन का अनुमान लगभग 280 लाख टन है। ऐसे में मांग और उत्पादन के बीच अंतर को देखते हुए सरकार चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठा रही है।

पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का कार्यक्रम भी जरूरी

भारत लंबे समय से पेट्रोल में एथनॉल मिलाने को प्रोत्साहित कर रहा है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और विदेशी मुद्रा की बचत करना है। ऐसे में सरकार के सामने चीनी उत्पादन के लिए पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराने और एथनॉल की आपूर्ति बनाए रखने की दोहरी चुनौती है।

हालांकि, अनाज आधारित एथनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से मक्का और चावल की मांग पर दबाव पड़ सकता है। इससे खाद्य सुरक्षा और पशुचारे की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका भी रहती है।

चीनी मिलों पर भी पड़ सकता है असर

एथनॉल खरीद नीति में बदलाव से उन चीनी मिलों की उत्पादन और बिक्री योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जो गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथनॉल बनाती हैं। उन्हें वैकल्पिक कच्चे माल और उत्पादन की रणनीति पर विचार करना पड़ सकता है।

क्या सस्ती होगी चीनी? सरकार के इस फैसले का उद्देश्य चीनी की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाना है। हालांकि, कीमतें वास्तव में कितनी घटेंगी, यह चीनी के वास्तविक उत्पादन, बाजार में आपूर्ति और मांग पर निर्भर करेगा।

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