पुलिस शहीद स्मृति दिवस: देश की रक्षा में शहीद 154 पुलिसकर्मियों को दी जाएगी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। देशभर में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन वीर पुलिसकर्मियों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान को याद करने का अवसर है, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

पुलिस स्मृति दिवस का इतिहास 21 अक्टूबर 1959 से जुड़ा है। उस समय लद्दाख के हॉट स्प्रिंग क्षेत्र में भारत-तिब्बत सीमा की सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तीसरी बटालियन की एक कंपनी तैनात थी। गश्त के दौरान 21 जवानों के एक दल पर चीनी सैनिकों ने घात लगाकर हमला कर दिया। जवानों ने सीमित संख्या में होने के बावजूद हमलावरों का बहादुरी से मुकाबला किया। इस संघर्ष में 10 वीर जवान मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।

इन शहीद पुलिसकर्मियों के सम्मान और स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए जनवरी 1960 में दिल्ली में आयोजित पुलिस महानिरीक्षकों के सम्मेलन में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। तब से हर साल इस दिन शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

154 पुलिसकर्मियों ने दिया सर्वोच्च बलिदान

उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक देश के विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कुल 154 पुलिसकर्मियों ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान अपने प्राणों का बलिदान दिया।

इनमें छत्तीसगढ़ के 6 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों के पुलिसकर्मियों और बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी तथा आरपीएफ जैसे बलों के जवानों ने भी देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।

शहीदों का बलिदान हमेशा करेगा प्रेरित

पुलिस स्मृति दिवस केवल शहीद जवानों को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि उनके साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा से प्रेरणा लेने का अवसर भी है। देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और नागरिकों की रक्षा के लिए पुलिसकर्मी कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।

इस अवसर पर देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले सभी वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को देशप्रेम, सेवा और कर्तव्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।

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