नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चा के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया है कि कोई भी नया नोटिस मिलने पर नियमों और निर्धारित संसदीय प्रक्रियाओं के अनुसार ही उसकी जांच की जाएगी।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ओम बिरला से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक और महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने की संभावना को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि नया नोटिस आने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुके हैं महाभियोग के प्रयास
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष पहले भी दो बार प्रयास कर चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले प्रयास से संबंधित नोटिस लोकसभा और राज्यसभा में खारिज कर दिए गए थे, जबकि दूसरे प्रयास के नोटिस उच्च सदन में लंबित बताए जा रहे हैं।
पिछले दो सप्ताह से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध तेज हुआ है। विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित गड़बड़ियों को लेकर उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के कामकाज पर उठे सवाल
इस विवाद के बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया कि कुछ आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे।
इन दावों के सामने आने के बाद चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर प्रक्रिया के प्रबंधन को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
फिलहाल, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। नए महाभियोग प्रस्ताव पर आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि विपक्ष की ओर से कोई औपचारिक नोटिस दिया जाता है या नहीं और उस पर संसदीय नियमों के तहत क्या निर्णय लिया जाता है।