मणिपुर। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक बार फिर हिंसा की घटनाओं ने हालात को संवेदनशील बना दिया है। नोनी और कांगपोकपी जिलों में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में कुल पांच लोगों की जान चली गई। एक ओर नोनी जिले के पहाड़ी जंगलों में दो सशस्त्र गुटों के बीच हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हुई, वहीं दूसरी ओर कई दिनों से लापता दो युवकों के शव बरामद किए गए हैं। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
पहाड़ी जंगलों में चली गोलियां, तीन लोगों की गई जान
नोनी जिले के केकड़ू नागा गांव के आसपास शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पहाड़ी जंगलों में दो सशस्त्र गुटों के बीच फायरिंग शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि दुर्गम इलाके में कई घंटों तक रुक-रुककर गोलीबारी होती रही। घटना के बाद तलाशी के दौरान तीन लोगों के शव मिले। मृतकों की पहचान थांगलेंसंग सिंगसन, थांगखोसेई हाओकिप और लम्मिनसंग किपजेन के रूप में हुई है। तीनों चुराचंदपुर जिले के हेंगलेप और थानलन क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं।
कुकी संगठन ने जताया आक्रोश, जांच की मांग
इस घटना के बाद कुकी समुदाय के संगठन कुकी इनपी मणिपुर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन का दावा है कि मृतक अपने क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ग्राम स्वयंसेवक के रूप में तैनात थे। संगठन ने आरोप लगाया है कि इस हमले में नगा उग्रवादी समूह शामिल हो सकते हैं। साथ ही सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
28 अक्टूबर से लापता थे दो युवक, तलाशी अभियान में मिले शव
मणिपुर में तनाव की दूसरी बड़ी वजह कांगपोकपी जिले से जुड़ी है। यहां 28 अक्टूबर से लापता दो युवकों के शव रविवार को सुरक्षा बलों के संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान बरामद हुए। मृतकों की पहचान ताफौ गांव के तांगगिनलुन चोंगलोई और पाओगिनलाल हांगसिंग के रूप में हुई है।
दोनों युवकों के लापता होने के बाद पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और असम राइफल्स की टीमें लगातार उनकी तलाश में जुटी थीं। राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के पूर्वी हिस्से और आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा था। शव मिलने के बाद क्षेत्र में आक्रोश और तनाव और बढ़ गया है।
COTU के विरोध से राजमार्गों पर बढ़ी परेशानी
दोनों युवकों के लापता होने के मामले में स्थानीय आदिवासी संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) पहले ही विरोध प्रदर्शन कर रहा था। संगठन ने 29 अक्टूबर की शाम से 48 घंटे के बंद का आह्वान किया था और युवकों की सुरक्षित वापसी की मांग उठाई थी। अब शव बरामद होने के बाद संगठन ने विरोध का दायरा बढ़ाते हुए प्रमुख राजमार्गों पर नाकेबंदी और बंद जारी रखने का फैसला किया है।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त, संवेदनशील इलाकों पर नजर
लगातार दो घटनाओं के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। संभावित हिंसा और आपसी टकराव को रोकने के लिए सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती के साथ गश्त भी बढ़ाई गई है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रण में रखना और किसी भी तरह की नई हिंसक घटना को रोकना है।