Teej Vrat 2025 : 26 जुलाई को हरितालिका तीज का पावन पर्व मनाया जाएगा। सुहागिन और अविवाहित महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत से पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और विवाह योग्य कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है। तीज व्रत की पूजा में थाली का विशेष महत्व माना गया है और इसमें हर आवश्यक सामग्री का होना अनिवार्य बताया गया है।
पूजा थाली में शामिल हों ये सामग्री
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार तीज की पूजा थाली में भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर के लिए फूल और माला अवश्य रखी जानी चाहिए। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा, आकड़े के फूल, चंदन, रोली, अक्षत और गंगाजल होना जरूरी है। वहीं व्रती महिलाओं को थाली में लाल-सफेद चुनरी, सुहाग का सामान जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी और आलता भी सजाकर रखना चाहिए।
इसके अलावा शिव-पार्वती को अर्पण करने के लिए मौसमी फल, पान के पत्ते, नारियल और मिठाई रखना आवश्यक बताया गया है। चूंकि यह व्रत निर्जला होता है, इसलिए पूजा थाली में जल से भरा कलश और दूध-दही-घी जैसे पंचामृत के घटक भी रखे जाते हैं।
दीपक और धूप का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि हरितालिका तीज की पूजा थाली में दीपक और धूप का होना अनिवार्य है। इसके साथ ही एक छोटे पात्र में शहद और शक्कर भी रखी जानी चाहिए, जिनका प्रयोग पंचामृत बनाने में किया जाता है। वहीं, अगर घर में मौसमी फल जैसे केला, अमरूद या सेब उपलब्ध हों, तो उन्हें भी थाली में रखना शुभ माना गया है।
मिलेगा सुख-सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद
मान्यता है कि सुसज्जित पूजा थाली से किए गए हरितालिका तीज व्रत से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं। इससे महिलाओं को अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और जीवन में समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।