नोएडा | बाइकबोट घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने पाया है कि निवेशकों से जुटाई गई भारी-भरकम रकम को सीधे कंपनियों में लगाने के बजाय विभिन्न संबंधित कंपनियों के जरिए घुमाया गया। इसके बाद यह धनराशि शैक्षिक ट्रस्टों, सोसाइटियों और व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) की तरह काम करता था। निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच देकर पैसे इकट्ठा किए गए और फिर उन्हें अलग-अलग संस्थानों व व्यक्तियों में बांटकर वैध दिखाने की कोशिश की गई।
एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन-किन ट्रस्टों और सोसाइटियों के जरिए इस रकम को आगे बढ़ाया गया और इसमें कौन-कौन से प्रभावशाली लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कई और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।
निवेशकों की गाढ़ी कमाई से खड़ा किया गया यह जाल अब कानूनी शिकंजे में फंसता दिख रहा है।