Vishwakarma Puja 2025: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को शिल्पकार, वास्तुकार और यंत्रों के देवता माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने सतयुग में स्वर्ग, त्रेतायुग में लंका, द्वापर में द्वारका और कलियुग में जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों का निर्माण किया। भाद्रपद माह शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को उनका जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन को विश्वकर्मा जयंती के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
तारीख व योग
इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2025 (बुधवार) को होगी। खास बात यह है कि इस दिन शिव और गौरी योग का संयोग रहेगा, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाएगा।
सूर्य का गोचर
सूर्य देव 16 सितंबर की रात 01:55 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
शुभ मुहूर्त
- पुण्य काल: सुबह 05:36 बजे से दोपहर 11:44 बजे तक
- महा पुण्य काल: सुबह 05:36 बजे से 07:39 बजे तक
- पूजा का मुख्य मुहूर्त: सुबह 07:50 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
(यदि यह मुहूर्त चूक जाए तो शाम 6 बजे तक पूजा की जा सकती है)
पूजा सामग्री
भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति, लकड़ी की चौकी, पीला कपड़ा, नवग्रह, मिट्टी का कलश, जनेऊ, हल्दी, रोली, अक्षत, सुपारी, मौली, लौंग, कपूर, देसी घी, हवन कुंड, आम की लकड़ी, गंगाजल, इलायची, सूखा गोला, जटा वाला नारियल, फल, मिठाई, इत्र, दही, खीरा, शहद, पंचमेवा आदि।
मंत्र जाप
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है:
- ॐ आधार शक्तपे नमः
- ॐ कूमयि नमः
- ॐ अनन्तम नमः
- पृथिव्यै नमः
- ॐ धराधराय नमः
- ॐ स्थूतिस्माय नमः
- ॐ विश्वरक्षकाय नमः
- ॐ दुर्लभाय नमः
- ॐ स्वर्गलोकाय नमः
- ॐ पंचवकत्राय नमः
- ॐ विश्वलल्लभाय नमः
- ॐ धार्मिणे नमः
इस प्रकार 17 सितंबर 2025 को भगवान विश्वकर्मा की पूजा विधि-विधान से करने पर घर-परिवार और कार्यक्षेत्र में सुख-समृद्धि एवं सफलता की प्राप्ति होती है।