नॉर्थ ब्लॉक–साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ तक: बदलते भारत की प्रशासनिक यात्रा

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव को मंजूरी देते हुए ऐतिहासिक नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से सरकारी दफ्तरों को नए परिसरों ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ में स्थानांतरित करने का फैसला किया है। शनिवार को साउथ ब्लॉक में कैबिनेट की अंतिम बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद स्थानांतरण प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नया प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ नाम से राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उनके अनुसार यह कदम सिर्फ कार्यालय बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन है।

ऐतिहासिक इमारतों का नया अध्याय

ब्रिटिश काल में निर्मित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक लंबे समय तक देश के सर्वोच्च प्रशासनिक फैसलों के केंद्र रहे। आजादी के बाद भी प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से ही संचालित होता रहा। इन इमारतों ने स्वतंत्र भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी अनेक अहम निर्णयों को आकार लेते देखा।

नए दौर की जरूरतों के अनुरूप बदलाव

सरकार का मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तकनीक-सक्षम, ऊर्जा-कुशल और आधुनिक कार्यस्थल आवश्यक हैं। ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ को इसी सोच के तहत डिजाइन किया गया है, ताकि प्रशासनिक दक्षता और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिल सके।

संग्रहालय के रूप में होगा पुनर्विकास

मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय लिया है कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को भविष्य में राष्ट्रीय संग्रहालय परिसर का हिस्सा बनाया जाएगा। प्रस्तावित संग्रहालय में भारत की प्राचीन सभ्यता, स्वतंत्रता संग्राम और आधुनिक विकास यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी देश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।

सरकार का कहना है कि यह बदलाव अतीत की विरासत को संरक्षित रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशासनिक संरचना तैयार करने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम है।

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