नई दिल्ली: अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी और अमेरिका तथा NATO देशों को भी स्पष्ट संदेश भेजा। मुत्ताकी ने कहा कि किसी को भी अफगानिस्तान की हिम्मत को परखने की भूल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि अफगानिस्तान सभी देशों के साथ शांति और सहयोग के रास्ते पर विश्वास रखता है और भारत के साथ मजबूत और सकारात्मक रिश्तों की उम्मीद है।
मुत्ताकी ने हाल ही में सीमा पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की आलोचना की। उन्होंने कहा, “दूर-दराज क्षेत्रों में हुए हमले स्वीकार्य नहीं हैं। ये मसले बातचीत के जरिए हल होने चाहिए। पाकिस्तान को अपने मुद्दे खुद सुलझाने होंगे।” उन्होंने साफ किया कि अफगानिस्तान किसी भी प्रकार के सैन्य हस्तक्षेप या बाहरी ताकतों की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा, “अफगानिस्तान 40 साल बाद शांति और विकास की राह पर है। किसी को इससे परेशानी नहीं होनी चाहिए। अगर कोई हमारी आजादी और हिम्मत को परखना चाहता है, तो वे इतिहास से सीख लें – सोवियत यूनियन, अमेरिका और NATO भी इसका अनुभव जानते हैं।”
चाबहार पोर्ट पर जोर
मुत्ताकी ने चाबहार पोर्ट को भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग बताया और कहा कि इस रास्ते को खुला रखना दोनों देशों के हित में है। उन्होंने अमेरिका द्वारा लगाई गई पाबंदियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अफगानिस्तान को मिलकर इन बाधाओं को दूर करना चाहिए। “चाबहार पोर्ट व्यापार के लिए अहम है। अगर यह बंद होता है तो दोनों देशों के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचेगा,” उन्होंने कहा।
भारत का दोस्ताना संदेश
इस मौके पर भारत ने अफगानिस्तान के प्रति अपने समर्थन को फिर एक बार दर्शाया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मुत्ताकी को 5 एंबुलेंस सौंपीं, जो 20 एंबुलेंस और अन्य मेडिकल उपकरणों के तोहफे का हिस्सा हैं। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह सहयोग अफगान जनता के लिए भारत के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन का प्रतीक है।
मुत्ताकी ने भारतीय सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह दोस्ताना कदम दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करेगा और क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देगा।