नई दिल्ली। भारत अब 6G युग की ओर तेजी से अग्रसर है। सरकार ने ‘भारत 6G विजन’ के तहत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 6G देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है। इस मिशन के तहत अब तक 104 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर कुल 275.88 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। देशभर के 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में 5G और 6G लैब्स स्थापित की जा रही हैं, जहां वैज्ञानिक अगली पीढ़ी की संचार तकनीक पर शोध कर रहे हैं।
6G के मुख्य लाभ
- 6G नेटवर्क 5G से कई गुना तेज और स्मार्ट होगा। इसमें कई नई तकनीकें शामिल की जा रही हैं, जो संचार की दिशा ही बदल देंगी।
- टेराहर्ट्ज फ्रिक्वेंसी: डेटा स्पीड 5G की तुलना में लगभग 100 गुना तेज होगी।
- AI-नेटिव नेटवर्क: नेटवर्क पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग द्वारा संचालित होगा, जो रियल टाइम रूटिंग और बैंडविथ मैनेजमेंट संभालेगा।
- कम्युनिकेशन और सेंसिंग इंटीग्रेशन: नेटवर्क केवल डेटा ट्रांसमिट नहीं करेगा, बल्कि अपने आसपास के वातावरण को भी समझेगा। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की सटीक लोकेशन या मूवमेंट को ट्रैक करना।
- सैटेलाइट, ड्रोन और हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म: 6G नेटवर्क में ये सभी तकनीकें जमीन आधारित नेटवर्क के साथ जुड़ेगी, जिससे दूरदराज के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी तेज इंटरनेट पहुंच सकेगा।
- लाई-फाई (Li-Fi) तकनीक: यह तकनीक लाइट के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, यानी जहां फाइबर केबल न हो वहां भी नेटवर्क उपलब्ध होगा।
6G का असर किन क्षेत्रों में दिखेगा?
- स्मार्ट हेल्थकेयर: डॉक्टर दूर से ही रियल टाइम सर्जरी और सेंसर मॉनिटरिंग कर पाएंगे।
- ऑटोनॉमस व्हीकल्स: अत्यंत कम लेटेंसी की वजह से सेल्फ-ड्राइविंग कारें और ड्रोन अधिक सटीक और सुरक्षित काम करेंगे।
- इंडस्ट्री 4.0: फैक्ट्रियों में AI रोबोट्स और रियल टाइम ऑटोमेशन सिस्टम काम संभालेंगे।
- स्मार्ट सिटीज: हर डिवाइस इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) से जुड़ा होगा, जिससे ऊर्जा की बचत, सुरक्षा और निगरानी क्षमता बढ़ेगी।
भारत की यह पहल न केवल देश को डिजिटल क्रांति में अगला कदम बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में भी तेज और स्मार्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।