
जयपुर। भारत के विशाल और असंगठित स्क्रैप बाजार को संगठित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक नई पहल शुरू हुई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्लेटफॉर्म ‘स्क्रैपकार्ट’ के जरिए देश की 18 अरब डॉलर की अपशिष्ट अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी है। स्क्रैपकार्ट न केवल औद्योगिक स्क्रैप के कारोबार को डिजिटल और पारदर्शी बना रहा है, बल्कि यह उद्योगों, एमएनसी, एसएमई और रिसाइकलर्स के लिए कचरा प्रबंधन को जिम्मेदार और लाभदायक भी बना रहा है।
स्क्रैप कारोबार का पहला AI-आधारित डिजिटल मार्केटप्लेस
स्क्रैपकार्ट भारत का पहला ऐसा डिजिटल बाज़ार है जो लौह, अलौह और ई-कचरे जैसे औद्योगिक स्क्रैप की खरीद-फरोख्त के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करता है। यह प्लेटफॉर्म रियल-टाइम बोली प्रक्रिया के माध्यम से कंपनियों को अपने स्क्रैप के लिए सर्वश्रेष्ठ मूल्य प्राप्त करने का मौका देता है। साथ ही, मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता, आसान दस्तावेजीकरण, स्क्रैप की गुणवत्ता और मात्रा की गारंटी तथा ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) अनुपालन की सुविधा भी प्रदान करता है।
संस्थापक का विजन: कबाड़ को भी बनाएंगे कारोबार का इंजन
स्क्रैपकार्ट के संस्थापक विनीत रेलिया के अनुसार, “भारत का स्क्रैप इकोसिस्टम बहुत बड़ा है, लेकिन डिजिटलीकरण की कमी के कारण यह काफी असंगठित है। हम स्क्रैपकार्ट के माध्यम से मौजूदा बाधाओं को खत्म कर, स्क्रैप व्यवसाय को पारदर्शी, लाभदायक और जिम्मेदार बना रहे हैं।”
स्क्रैपकार्ट की AI-संचालित क्रांति की खास बातें:
- बिचौलियों का अंत: स्क्रैप की खरीद-फरोख्त की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होकर सीधे विक्रेता और खरीदार को जोड़ती है।
- AI से मूल्यांकन में सटीकता: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए स्क्रैप की मात्रा, गुणवत्ता और कीमत का सटीक अनुमान।
- डिजिटल ट्रेसबिलिटी: जीपीएस ट्रैकिंग और डिजिटल वेट स्लिप के माध्यम से हर सौदे का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित और पारदर्शी।
- सुरक्षित और पेपरलेस भुगतान: एस्क्रो पेमेंट और डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट्स से सौदों में पारदर्शिता और सुरक्षा।
- ESG और नियमों का पालन: डिजिटल ऑडिट और रिपोर्टिंग टूल्स के जरिए कंपनियों को उनके स्थिरता लक्ष्यों और सरकारी नियमों के अनुरूप बनाए रखना।
स्वच्छ भारत और चक्रीय अर्थव्यवस्था में स्क्रैपकार्ट की भूमिका
स्क्रैपकार्ट का यह नवाचार केंद्र सरकार के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR)’ जैसे कार्यक्रमों के उद्देश्यों को मजबूती देगा। भारत में हर साल 6.2 करोड़ टन से अधिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसे यदि सही तरीके से प्रबंधित किया जाए तो यह न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रख सकता है, बल्कि अर्थव्यवस्था में भी नया इंजन बन सकता है।
स्क्रैपकार्ट का उद्देश्य इस असंगठित स्क्रैप बाजार में डिजिटलीकरण और पारदर्शिता लाकर इसे एक संगठित, कुशल और सतत विकासशील उद्योग में बदलना है।