वॉशिंगटन। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अपनी सदस्यता समाप्त कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले दिन किए गए वादे को पूरा करने के उद्देश्य से उठाया है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय कोविड-19 महामारी के दौरान WHO की कथित विफलताओं और संगठन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकारी आदेश के तहत अमेरिका ने WHO से पूरी तरह अलग होने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। बयान में कहा गया कि संगठन ने अपने मूल उद्देश्य से भटकते हुए अमेरिकी हितों की अनदेखी की और महामारी के समय सटीक जानकारी साझा नहीं की।
ट्रंप प्रशासन ने WHO पर राजनीतिक एजेंडे अपनाने और महामारी के दौरान जानकारी छिपाने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि संगठन ने अमेरिका विरोधी देशों के प्रभाव में आकर नीति बनाई और अमेरिकी जनता को हुई जान-माल की हानि को छिपाया गया। अमेरिका के बाहर निकलने के बाद संगठन का व्यवहार अपमानजनक बताया गया; अमेरिकी झंडा लौटाने से इनकार और वापसी मंजूरी न देने का दावा भी किया गया।
संगठन से अलग होने के बाद अमेरिका ने WHO के साथ अपने सभी वित्तीय योगदान और स्टाफिंग समाप्त कर दी है। अब अमेरिकी सरकार का ध्यान सीधे द्विपक्षीय स्वास्थ्य साझेदारियों और भरोसेमंद स्वास्थ्य संस्थानों के जरिए वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व पर रहेगा। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह निर्णय महामारी में पीड़ित अमेरिकियों, विशेषकर नर्सिंग होम में मरे बुजुर्गों और कोविड प्रतिबंधों से प्रभावित व्यवसायियों का सम्मान करने के लिए लिया गया है।
अमेरिका 1948 में WHO का संस्थापक सदस्य बना था और लंबे समय तक सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अब संगठन के साथ संपर्क केवल आवश्यक मामलों तक सीमित रहेगा और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होगी।