वाशिंगटन: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि वाशिंगटन पाकिस्तान के साथ अपने रणनीतिक सहयोग को तो मजबूत करना चाहता है, लेकिन यह प्रक्रिया भारत के साथ उसके ऐतिहासिक और गहरे संबंधों को प्रभावित नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की दक्षिण एशिया नीति संतुलन और परिपक्व कूटनीति पर आधारित है।
रुबियो ने यह टिप्पणी मलेशिया के कुआलालंपुर में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन के लिए रवाना होने से पहले की, जहां उनकी मुलाकात भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से होने वाली है। उन्होंने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। पाकिस्तान के साथ हमारे बढ़ते संपर्कों को भारत के हितों के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए। हमें अनेक देशों के साथ समानांतर रूप से साझेदारी निभानी होती है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत एक “परिपक्व और व्यावहारिक” कूटनीति अपनाता है और यह समझता है कि वैश्विक संबंध हमेशा बहुआयामी होते हैं। रुबियो के अनुसार, “भारत खुद कई ऐसे देशों से संबंध रखता है जिनसे हमारे रिश्ते जटिल हैं। इसलिए हम भी अपने रणनीतिक हितों के आधार पर फैसले लेते हैं।”
हाल के महीनों में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संवाद तेज हुआ है। खासकर भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाक सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मुलाकात ने इसे नया आयाम दिया। पाकिस्तान ने दावा किया कि संघर्ष विराम में ट्रंप की भूमिका रही, जबकि भारत ने इसे सिरे से नकार दिया।
भारत-रूस के ऊर्जा संबंधों पर पूछे गए सवाल पर रुबियो ने कहा कि नई दिल्ली पहले ही तेल आयात में विविधता लाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा, “भारत इस बात को लेकर गंभीर है कि उसकी ऊर्जा निर्भरता किसी एक देश पर न रहे। अगर वे विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदेंगे, तो निश्चित रूप से इससे हमारे व्यापारिक अवसर भी बढ़ेंगे।”
अमेरिका ने हाल ही में रूस की प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाया है, जिससे भारतीय तेल कंपनियों के लिए रूसी कच्चा तेल आयात करना मुश्किल हो सकता है।
रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कई व्यापक व्यापारिक मुद्दे हैं, लेकिन दोनों देश “स्थायी साझेदार और विश्वसनीय मित्र” बने रहेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर बढ़ाए गए 50 प्रतिशत आयात शुल्क ने रिश्तों में कुछ तनाव पैदा किया है। भारत ने इस कदम को “अनुचित और अविवेकपूर्ण” बताते हुए आपत्ति जताई थी।
अमेरिकी विदेश मंत्री ने अंत में कहा, “भारत-अमेरिका संबंध केवल ऊर्जा या व्यापार तक सीमित नहीं हैं। ये लोकतंत्र, तकनीक और वैश्विक स्थिरता के साझा मूल्यों पर आधारित हैं। हमें विश्वास है कि आने वाले समय में यह साझेदारी और भी मजबूत होगी।”