सियोल : कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में इस सप्ताह एक असामान्य सैन्य गतिविधि ने क्षेत्रीय हलकों में हलचल पैदा कर दी। जानकारी के अनुसार, United States और China के लड़ाकू विमान एक ही समय पर पश्चिमी सागर (येलो सी) के ऊपर सक्रिय रहे, जिससे कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना के कई फाइटर जेट्स ने दक्षिण कोरिया स्थित Pyeongtaek के पास से उड़ान भरते हुए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की ओर रुख किया। ये विमान नियमित प्रशिक्षण मिशन पर थे और किसी भी देश की संप्रभु हवाई सीमा में दाखिल नहीं हुए। हालांकि, जब वे चीन द्वारा घोषित वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) के करीब पहुंचे, तो बीजिंग ने एहतियातन अपने लड़ाकू विमानों को निगरानी के लिए रवाना कर दिया।
क्या है ADIZ?
एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन (ADIZ) किसी देश की आधिकारिक सीमा नहीं होता, बल्कि सुरक्षा के लिहाज़ से बनाया गया एक बाहरी हवाई निगरानी क्षेत्र होता है। इसमें प्रवेश करने वाले विदेशी विमानों से अपनी पहचान बताने की अपेक्षा की जाती है, ताकि संभावित सुरक्षा खतरे को समय रहते समझा जा सके।
चीनी सरकारी मीडिया आउटलेट Global Times ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि People’s Liberation Army ने स्थापित नियमों के तहत स्थिति पर नजर रखी और जरूरत के मुताबिक वायु एवं नौसैनिक संसाधनों को सक्रिय किया।
दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी बलों का नेतृत्व करने वाले United States Forces Korea ने इस घटना पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने भी सीमित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त रक्षा सहयोग के ढांचे में काम करती हैं, लेकिन इस विशेष उड़ान अभियान की विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच ऐसी घटनाएं संवेदनशील मानी जाती हैं। Japan, Taiwan और दक्षिण चीन सागर से जुड़े मुद्दों ने पहले ही क्षेत्र में अविश्वास की स्थिति पैदा कर रखी है। ऐसे में किसी भी तरह की हवाई गतिविधि, भले ही वह अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में क्यों न हो, कूटनीतिक संदेश के रूप में देखी जाती है।
हालांकि अभी तक किसी टकराव या नियमों के उल्लंघन की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि एशिया-प्रशांत का आसमान वैश्विक शक्तियों की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम मंच बन चुका है।