अमित शाह का बड़ा दांव: महिलाओं को हर महीने ₹3000 देने का वादा

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया, जिसे ‘भरोसा पत्र’ नाम दिया गया है। कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस दस्तावेज़ का विमोचन किया। घोषणापत्र में महिलाओं, युवाओं और किसानों सहित विभिन्न वर्गों के लिए कई योजनाओं और आर्थिक सहायता के वादे किए गए हैं।

इस दौरान अमित शाह ने कहा कि यह संकल्प पत्र राज्य को वर्तमान चुनौतियों से बाहर निकालकर विकास की नई दिशा देगा। उनके अनुसार, यह दस्तावेज़ कानून व्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और ‘सोनार बंगला’ के निर्माण की रूपरेखा पेश करता है।

उन्होंने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने पहले वामपंथी शासन से परेशान होकर बदलाव किया था, लेकिन मौजूदा सरकार भी लोगों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई।

अमित शाह ने आरोप लगाया कि वर्तमान शासन में अवैध गतिविधियां, ‘सिंडिकेट राज’ और असुरक्षा का माहौल बढ़ा है। उनका कहना था कि अब राज्य की जनता बदलाव चाहती है और नई सरकार की उम्मीद कर रही है।

घोषणापत्र में किसानों की मदद, युवाओं को रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की बात भी कही गई है। यह दस्तावेज़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विज़न को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

भाजपा ने अपने वादों में घुसपैठ के खिलाफ सख्त नीति अपनाने, सरकारी कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन देने और महंगाई भत्ता सुनिश्चित करने की बात कही है। इसके अलावा कुर्माली और राजबोंगशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

पार्टी ने कृषि, मत्स्य पालन और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं पेश की हैं, जिनमें किसानों और मछुआरों को सहायता देने की बात शामिल है। महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को हर महीने आर्थिक मदद देने का भी वादा किया गया है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में मुफ्त एचपीवी टीकाकरण, कैंसर जांच, और उत्तर बंगाल में एम्स, आईआईटी व आईआईएम जैसे संस्थानों की स्थापना की योजना है। इसके साथ ही ‘वंदे मातरम संग्रहालय’ बनाने और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कानून लाने की भी बात कही गई है।

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