खनिज क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि: छत्तीसगढ़ ने लीथियम खदान की नीलामी कर बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

रायपुर | छत्तीसगढ़ राज्य खनिज संपदा के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ राज्य बनता जा रहा है। प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न अंचलों में उपलब्ध हैं, जिनके वैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी खनन के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। खनिज संसाधन सचिव पी. दयानंद के अनुसार, बीते दो वर्षों में खनिज नीलामी और सुनियोजित उत्खनन से राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

खनिज क्षेत्र के विकास को गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2001 में गठित छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सी.एम.डी.सी.) आज अन्वेषण, खनन, मार्केटिंग, एमडीओ मॉडल और संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में निगम द्वारा टिन, बॉक्साइट, लौह अयस्क, तांबा, हीरा, मैंगनीज, कोरंडम, डोलोमाइट और कोयला सहित नौ खनिजों में कार्य किया जा रहा है।

टिन खनन से जनजातीय आजीविका को संबल

विशेष रूप से बस्तर अंचल में टिन खनिज की खरीदी के माध्यम से अनुसूचित जनजाति समुदाय को सीधा लाभ पहुँचाया जा रहा है। टिन के क्रय मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि करते हुए इसे 1926 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है, जिससे आदिवासी परिवारों की आय लगभग तीन गुना बढ़ी है। ऑनलाइन खरीदी और रियल-टाइम भुगतान की व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसके लिए ‘TIN – Tribal Incentive for Natural Resources’ पोर्टल विकसित किया जा रहा है।

क्रिटिकल मिनरल में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

राज्य में क्रिटिकल मिनरल के क्षेत्र में भी ठोस प्रगति हो रही है। बलरामपुर जिले में मैंगनीज और ग्रेफाइट के अन्वेषण में सी.एम.डी.सी. को उत्साहजनक परिणाम मिले हैं। इसके अतिरिक्त कोल इंडिया लिमिटेड के साथ किए गए समझौते के तहत खनन, प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और युवाओं के कौशल विकास की दिशा में संयुक्त कार्यवाही प्रारंभ हो चुकी है।

पारदर्शी नीलामी से रिकॉर्ड राजस्व

मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सी.एम.डी.सी. ने MSTC के माध्यम से तकनीक-आधारित पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया अपनाई है। इससे लौह अयस्क की बिक्री में रिकॉर्ड मूल्य प्राप्त हुए हैं, वहीं उत्खनन लागत न्यूनतम रही है। आरीडोंगरी लौह अयस्क खदान से पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य को लगभग 28.65 करोड़ रुपये का राजस्व और निगम को 24 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

इस खदान से 200 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। उत्पादन क्षमता को 5 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना पर कार्य चल रहा है। सरगुजा जिले में संचालित खदानों से भी राज्य और निगम को करोड़ों रुपये की आय हुई है।

संयुक्त उपक्रमों से बड़े प्रोजेक्ट्स को गति

बैलाडिला क्षेत्र के डिपॉजिट-04 और डिपॉजिट-13 में सी.एम.डी.सी.-एन.एम.डी.सी. संयुक्त उपक्रम के तहत शीघ्र खनन प्रारंभ होने जा रहा है। पूर्ण उत्पादन की स्थिति में इन परियोजनाओं से राज्य को लगभग 7,000 करोड़ रुपये और निगम को 3,000 करोड़ रुपये तक राजस्व मिलने की संभावना है।

महासमुंद जिले में हीरा-धारित किम्बरलाइट क्षेत्र में ड्रिलिंग जारी है, वहीं केरवा कोल परियोजना के लिए एमडीओ का चयन कर लिया गया है, जिससे क्षेत्रीय विकास और राजस्व दोनों को लाभ होगा।

भविष्य की योजनाएं

आने वाले वर्षों में लौह अयस्क, बॉक्साइट, डोलोमाइट और क्रिटिकल मिनरल में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है। टिन स्लैग और एल्युमिनियम स्लैग से टेंटलम, नियोबियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के निष्कर्षण के लिए पायलट परियोजनाएं शुरू होंगी। इसके साथ ही सी.एम.डी.सी. खनन से जुड़ी सेवाएं प्रदान कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की दिशा में भी कार्य करेगा।

राज्य सरकार के नेतृत्व में सी.एम.डी.सी. खनिज क्षेत्र को न केवल राजस्व का मजबूत आधार बना रहा है, बल्कि रोजगार, जनजातीय सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर भी ठोस कदम बढ़ा रहा है।

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