Naxali Surrender : देश में नक्सल संगठन की पकड़ लगातार कमजोर पड़ती नजर आ रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को तेलंगाना में नक्सल नेटवर्क को एक और बड़ा झटका लगा, जब 41 नक्सलियों ने हथियार डालकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से 39 नक्सली छत्तीसगढ़ से जुड़े थे, जबकि दो तेलंगाना के निवासी बताए जा रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में बड़ी संख्या सशस्त्र कैडर की थी। इनमें से 24 नक्सलियों ने हथियारों के साथ सरेंडर किया। पुलिस के अनुसार, नक्सलियों से तीन AK-47, एक लाइट मशीन गन (LMG), पांच SLR, सात राइफलें, एक बीजीएल गन, चार .303 राइफल, एक सिंगल शॉट राइफल और दो एयर गन बरामद की गई हैं।
इस आत्मसमर्पण में बटालियन नंबर-01 गुरिल्ला सेना के 11 सदस्य भी शामिल हैं, जिन्हें संगठन की मजबूत इकाई माना जाता था। इसके अलावा तेलंगाना के एर्रागल्ला रवि उर्फ संतोष और प्रवीण, जो पिछले 24 वर्षों से नक्सल गतिविधियों में सक्रिय थे, उन्होंने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया।
सरेंडर करने वालों में पार्टी सदस्य, पीडीएस सदस्य और क्षेत्रीय समितियों से जुड़े कैडर भी शामिल हैं। तेलंगाना की दूसरी नक्सल क्षेत्रीय समिति से जुड़े पांच सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया, वहीं कोत्तागुडेम और आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले से जुड़े डीवीसी राज्य समिति के चार सक्रिय कैडर भी पुलिस के सामने आए।
बताया जा रहा है कि यह आत्मसमर्पण तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के आह्वान के बाद संभव हुआ, जिसमें नक्सलियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की गई थी। सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार हो रही कार्रवाई से नक्सल संगठन के भीतर असंतोष बढ़ता दिख रहा है।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद को समाप्त करने की समयसीमा 31 मार्च 2026 तय की है। इसके बाद से सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हुई है। हाल के महीनों में कई बड़े नक्सली या तो मारे गए हैं या फिर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिनमें कुख्यात माओवादी कमांडर माडवी हिडमा का नाम भी शामिल है।
नक्सलियों के लगातार सरेंडर से संकेत मिल रहे हैं कि लाल आतंक अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता जा रहा है।