नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने करोड़ों सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत देते हुए पेंशन व्यवस्था से जुड़ा एक अहम आदेश जारी किया है। अब किसी पेंशन या पारिवारिक पेंशन में मनमाने तरीके से कटौती नहीं की जा सकेगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि एक बार अधिकृत (फाइनल) की गई पेंशन में तभी संशोधन होगा, जब कोई स्पष्ट लेखन, क्लेरिकल या गणना संबंधी त्रुटि पाई जाए।
यह आदेश कर्मचारी, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने जारी किया है। नई व्यवस्था के तहत यदि पेंशन में कोई त्रुटि दो वर्ष से अधिक समय बाद सामने आती है, तो उसमें संशोधन या कटौती करने से पहले DoPPW की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।
ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया है कि —
“एक बार जब पेंशन या पारिवारिक पेंशन को अंतिम रूप से अधिकृत कर दिया गया है या CCS (Pension) Rules, 2021 के नियम 66(1) के तहत संशोधित किया गया है, तब तक उसमें पेंशनर के नुकसान में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता, जब तक कोई क्लेरिकल गलती साबित न हो।”
गलत गणना पर अब नहीं होगी रिकवरी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर किसी पेंशनर को गलती से अधिक भुगतान हो गया है और यह उसकी गलती या गलत जानकारी देने की वजह से नहीं हुआ, तो संबंधित मंत्रालय यह तय करेगा कि वह राशि वापस ली जाए या माफ की जाए। इस निर्णय के लिए मंत्रालय को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग से परामर्श करना होगा।
यदि राशि की वसूली का निर्णय होता है, तो पेंशनर को दो महीने का नोटिस दिया जाएगा ताकि वह रकम लौटा सके। अगर ऐसा नहीं होता, तो राशि भविष्य की पेंशन किस्तों से किस्तों में वसूली जा सकती है।
बुजुर्ग पेंशनरों को मिलेगी राहत
यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले कई बार सेवानिवृत्ति के वर्षों बाद विभाग “गणना त्रुटि” का हवाला देकर पेंशन घटा देता था या रिकवरी नोटिस जारी कर देता था, जिससे बुजुर्ग पेंशनरों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
अब यह प्रथा समाप्त होगी और केवल वास्तविक क्लेरिकल त्रुटि पाए जाने पर ही संशोधन किया जाएगा, वह भी दो वर्ष की समय-सीमा के भीतर।
मंत्रालयों को सख्त निर्देश
DoPPW ने सभी मंत्रालयों, विभागों और पेंशन कार्यालयों को आदेश दिया है कि इस नई व्यवस्था का सख्ती से पालन किया जाए और इसे सभी शाखाओं तक पहुंचाया जाए ताकि भविष्य में किसी भी पेंशनर को अनावश्यक असुविधा न झेलनी पड़े।
सरकार के इस फैसले से न केवल पेंशन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि पेंशनरों में सरकारी व्यवस्था के प्रति भरोसा भी मजबूत होगा।