इस्लामाबाद/वॉशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में प्रस्तावित सोना–तांबा खनन परियोजना में बड़े निवेश की घोषणा की है। इस योजना के तहत करीब 1.3 अरब डॉलर की अमेरिकी फंडिंग की जाएगी। पाकिस्तान–ईरान सीमा के नजदीक स्थित रेको डिक खनन परियोजना की कुल लागत लगभग 7 अरब डॉलर आंकी गई है और इसके 2028 के अंत तक उत्पादन चरण में प्रवेश करने की संभावना जताई जा रही है।
यह बहुप्रतीक्षित परियोजना कनाडा की दिग्गज खनन कंपनी बैरिक माइनिंग कॉर्पोरेशन और पाकिस्तान सरकार के संयुक्त सहयोग से विकसित की जा रही है। अमेरिकी निवेश यूनाइटेड स्टेट्स एक्सपोर्ट–इम्पोर्ट बैंक (EXIM Bank) के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना में बैरिक माइनिंग की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जबकि शेष हिस्सेदारी पाकिस्तान की संघीय सरकारी कंपनियों और बलूचिस्तान प्रांतीय सरकार के बीच बराबर बांटी गई है।
हालांकि, इस परियोजना के सामने सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चुनौतियां भी हैं। बलूचिस्तान क्षेत्र में सक्रिय अलगाववादी और उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों के चलते खनन स्थल की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके साथ ही तांबे के कंसंट्रेट को कराची बंदरगाह तक पहुंचाने और आगे विदेश में प्रसंस्करण के लिए रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने की आवश्यकता भी सामने आई है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) सहित कई वित्तीय संस्थान मिलकर इस परियोजना के लिए 2.6 अरब डॉलर से अधिक का फाइनेंसिंग पैकेज तैयार करने में जुटे हैं। रेको डिक परियोजना को पाकिस्तान की खनिज संपदा रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार ने इस निवेश का स्वागत करते हुए इसे देश की अर्थव्यवस्था और खनन क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय विश्वास का प्रतीक बताया है। सरकार को उम्मीद है कि यह परियोजना लंबे समय में अरबों डॉलर की आय पैदा करेगी और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के विकास को नई दिशा देने में मददगार साबित होगी।