SIR के बाद बड़ा खुलासा: छह करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम सूची से हटे, चुनावी हलचल तेज

नई दिल्ली: देशभर में मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दूसरे चरण के पूरा होते ही बड़ा बदलाव सामने आया है। नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त वोटर लिस्ट से करीब 6.08 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पहले इन राज्यों में कुल मिलाकर लगभग 51 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, लेकिन संशोधन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 44.92 करोड़ रह गई है। जिन राज्यों में यह प्रक्रिया लागू हुई है, उनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, गुजरात, मध्यप्रदेश और गोवा सहित कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं।

क्या है SIR?

SIR यानी “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसके जरिए वोटर लिस्ट को पूरी तरह से अपडेट और शुद्ध किया जाता है। इसमें ऐसे नाम हटाए जाते हैं जो अब पात्र नहीं हैं—जैसे मृतक, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके लोग, डुप्लीकेट वोटर आईडी रखने वाले, या गलत तरीके से सूची में शामिल किए गए नाम।

क्यों जरूरी था यह अभियान?

लंबे समय से यह प्रक्रिया नहीं होने के कारण मतदाता सूचियों में कई त्रुटियां जमा हो गई थीं। इसी को सुधारने के लिए चुनाव आयोग ने दो दशक बाद इस बड़े स्तर का पुनरीक्षण अभियान शुरू किया। पहले चरण में Bihar में यह प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि दूसरे चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया।

आगे क्या?

चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का तीसरा चरण भी जल्द शुरू किया जाएगा, जिसमें बाकी राज्यों की मतदाता सूचियों को अपडेट किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चुनाव प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।

मतदाता सूची में इस बड़े बदलाव के बाद आने वाले चुनावों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है, खासकर उन राज्यों में जहां चुनावी माहौल पहले से ही गर्म है।

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