World Economic Forum: विश्व आर्थिक मंच के मंच से यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत–यूरोपीय संघ संबंधों को लेकर बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि ईयू और भारत के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
अपने संबोधन में वॉन डेर लेयेन ने अमेरिका को परोक्ष संदेश देते हुए साफ किया कि यूरोप अब टैरिफ दबावों से डरने वाला नहीं है और नए भरोसेमंद साझेदारों के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ पहले ही कई देशों के साथ अहम समझौते कर चुका है और भारत के साथ होने वाला करार अब तक का सबसे व्यापक और महत्वाकांक्षी समझौता साबित हो सकता है।
वॉन डेर लेयेन के मुताबिक यह प्रस्तावित समझौता करीब दो अरब लोगों के लिए नए बाजार के द्वार खोलेगा और वैश्विक जीडीपी के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को कवर करेगा। उन्होंने इसे “सभी समझौतों की जननी” बताते हुए कहा कि अभी कुछ औपचारिक काम बाकी है, लेकिन दोनों पक्ष एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं।
ईयू अध्यक्ष ने कहा कि यह समझौता यूरोप की आर्थिक मजबूती को नई दिशा देगा। उन्होंने बताया कि यूरोप अब लैटिन अमेरिका से लेकर एशिया–प्रशांत क्षेत्र तक के उभरते आर्थिक केंद्रों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है और वैश्विक साझेदार भी यूरोपीय संघ की ओर भरोसे के साथ देख रहे हैं।
वॉन डेर लेयेन अगले सप्ताह भारत दौरे पर आएंगी और 26 जनवरी को होने वाले 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। इसके बाद 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर एक अहम दस्तावेज अपनाया जा सकता है, जिसे आगे कानूनी प्रक्रिया और यूरोपीय संसद व परिषद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान सुरक्षा और रक्षा सहयोग से जुड़े समझौतों के साथ-साथ यूरोप में भारतीय पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने को लेकर भी सहमति बन सकती है। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी इस दौरान भारत में मौजूद रहेंगे और भारत–ईयू शिखर सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे।
इस बार गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय संघ की एक सैन्य टुकड़ी भी हिस्सा लेगी, जो दोनों पक्षों के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों का प्रतीक होगी। प्रस्तावित व्यापार समझौता भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय सौदा माना जा रहा है, जिसमें 27 सदस्य देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं और सेवाओं का व्यापक दायरा शामिल होगा।