31 मार्च से पहले बड़ी कामयाबी: बस्तर में 40 लाख का इनामी कमांडर पापाराव ने किया सरेंडर

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। कुख्यात नक्सली कमांडर पापाराव, जिस पर 40 लाख रुपये का इनाम घोषित था, उसने अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। यह सरेंडर केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद खत्म करने के लिए तय 31 मार्च 2026 की समयसीमा से ठीक पहले हुआ है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

18 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुकमा जिले के किस्टाराम क्षेत्र के निर्मलगुड़ा गांव का रहने वाला पापाराव माओवादियों के साउथ सब जोनल ब्यूरो का प्रमुख था और लंबे समय से सुरक्षा बलों की सूची में शामिल था। उसके साथ सरेंडर करने वालों में डीवीसीएम स्तर के दो इनामी नक्सली प्रकाश मड़वी और अनिल ताती भी शामिल हैं। कुल 18 नक्सली कैडर ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं।

एक करोड़ से अधिक का था इनाम

सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों पर मिलाकर एक करोड़ रुपये से ज्यादा का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण के बाद ये सभी अपने हथियार सुरक्षा बलों को सौंपेंगे। बताया जा रहा है कि इनके पास अत्याधुनिक हथियार, जिनमें एके-47 राइफलें भी शामिल हैं।

“मिशन 2026 एंड गेम” अभियान का असर

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह आत्मसमर्पण “मिशन 2026 एंड गेम” अभियान का परिणाम है, जिसके तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि यह घटना बस्तर में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है।

दंडकारण्य क्षेत्र में संगठन को बड़ा नुकसान

पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। अधिकारियों का मानना है कि इससे नक्सली संगठन की रणनीतिक क्षमता कमजोर होगी और अन्य कैडर भी हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

शांतिपूर्ण जीवन की ओर कदम

सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने की इच्छा जताई है। प्रशासन अब उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता और पुनर्समावेशन की प्रक्रिया से जोड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना को बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तेजी से पूरा होने की दिशा में बढ़ रहा है और ऐसे आत्मसमर्पण इस अभियान को मजबूती दे रहे हैं।

पापाराव जैसे बड़े नक्सली कमांडर का आत्मसमर्पण बस्तर में शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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