बिलासपुर हाई कोर्ट फैसला: स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय की याचिका खारिज, फार्मेसी काउंसलिंग में 60 सीटों की अनुमति बरकरार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (SVTU) और उससे संबद्ध कॉलेजों के बीच फार्मेसी सीटों को लेकर लंबा विवाद अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद समाप्त हो गया है। बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने विश्वविद्यालय की याचिका खारिज कर दी है और सिंगल बेंच के आदेश को सही ठहराया है। कोर्ट ने सभी कॉलेजों की सीटों को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा निर्धारित 60 सीटों के आधार पर काउंसलिंग कराने का निर्देश दिया।

विश्वविद्यालय ने 03 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी कर 52 कॉलेजों की प्रवेश क्षमता को आधा कर 30 सीटें निर्धारित की थीं। इसका कारण यह बताया गया कि कॉलेजों के प्राचार्य और संकाय सदस्यों की नियुक्ति नियम 19 के अनुसार पूरी नहीं हुई थी। कॉलेजों ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की और सिंगल बेंच ने विश्वविद्यालय के आदेश को रद्द कर 60 सीटों की मान्यता बहाल की।

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद कहा कि सिंगल बेंच का आदेश वैध है। कोर्ट ने कॉलेजों को छह महीने के भीतर प्राचार्य और आवश्यक संकाय नियुक्त करने का निर्देश दिया। यदि कॉलेज इस समय सीमा के भीतर आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करता, तो आदेश की प्रभावशीलता समाप्त हो जाएगी।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डी.फार्मेसी और बी.फार्मेसी पाठ्यक्रमों के लिए 60 छात्रों की प्रवेश क्षमता बरकरार रहेगी। विश्वविद्यालय ने अपने आदेश में प्रवेश मानकों और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कार्रवाई की थी, जबकि कॉलेज ने वचन दिया कि आवश्यक नियमों का पालन करेंगे।

इस फैसले से 2025-26 शैक्षणिक सत्र में छात्रों के प्रवेश में कोई बाधा नहीं आएगी और सभी कॉलेजों की सीटें निर्धारित संख्या के अनुसार काउंसलिंग के लिए उपलब्ध रहेंगी। यह फैसला छात्रों और शिक्षा जगत दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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