Boiled Water Effects: आजकल स्वास्थ्य और साफ-सफाई को लेकर लोगों में पहले से कहीं अधिक सतर्कता देखी जा रही है। इसी सतर्कता के चलते बहुत से लोग रोजाना उबला हुआ पानी पीने लगे हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि पानी उबालने से उसमें मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और कीटाणु खत्म हो जाते हैं, जिससे पेट संबंधी संक्रमण से बचाव होता है। यही कारण है कि घरों में बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को उबला पानी देने की परंपरा बन गई है।
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ पानी उबाल लेना ही काफी नहीं है। अगर उबले पानी को सही तरीके से इस्तेमाल या संग्रहित न किया जाए, तो यही पानी सेहत के लिए खतरा बन सकता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, उबालने के बाद पानी कितनी देर तक रखा जा रहा है और किस बर्तन में रखा जा रहा है, यह बेहद अहम है। कई बार लोग उबले पानी को घंटों या पूरे दिन खुला छोड़ देते हैं। ऐसे में हवा और धूल के संपर्क में आकर उसमें दोबारा बैक्टीरिया पनप सकते हैं। खासतौर पर गर्म और नमी वाले मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है।
- आम लेकिन खतरनाक लापरवाहियां
- उबले पानी को बिना ढके रखना
- साफ न किए गए पुराने बर्तनों में भरना
- एक ही पानी को बार-बार गर्म करना
लंबे समय तक स्टोर करके उसी पानी का इस्तेमाल करना
इन आदतों की वजह से उबला पानी भी दूषित हो सकता है। ऐसे पानी के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, गैस, फूड पॉइजनिंग और संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों, छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर जल्दी दिखाई देता है।
उबले पानी को सुरक्षित रखने के सही तरीके
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उबला पानी हमेशा साफ, सूखे और ढक्कन वाले बर्तन में ही रखा जाए। जरूरत के अनुसार ही पानी उबालें ताकि लंबे समय तक स्टोर करने की जरूरत न पड़े। एक ही पानी को दोबारा-दोबारा गर्म करने से बचें और हर बार ताजा उबला पानी ही पिएं।
इसके अलावा, पानी रखने वाले बर्तन को रोजाना अच्छी तरह धोना जरूरी है। अगर पानी से बदबू आने लगे, स्वाद बदला हुआ लगे या रंग में फर्क दिखे, तो उसे पीने के बजाय तुरंत फेंक देना ही सुरक्षित विकल्प है।