नई दिल्ली। कनाडा जाने का सपना देखने वाले भारतीयों के लिए बड़ी चिंता की खबर सामने आई है। कनाडाई संसद “स्ट्रॉन्ग बॉर्डर्स बिल” (Strong Borders Bill) पेश करने की तैयारी में है, जो अधिकारियों को अस्थायी वीजा रद्द करने की व्यापक शक्तियां देगा। इस कदम का मकसद कथित फर्जी वीजा आवेदनों पर रोक लगाना बताया जा रहा है, जिसमें प्रमुख रूप से भारत के आवेदक शामिल हो सकते हैं।
कौन प्रभावित होंगे?
इस नए बिल के तहत अस्थायी निवासियों, यानी विदेशी छात्र, काम करने वाले (Work Permit Holders) और पर्यटक (Visitors) सबसे अधिक प्रभावित होंगे। विधेयक में यह प्रावधान है कि महामारी, युद्ध या किसी आपात स्थिति में बड़े पैमाने पर वीजा रद्द किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
इमिग्रेशन वकील सुमित सेन के अनुसार, यदि यह बिल पास हो गया, तो हजारों भारतीय आवेदकों के वीजा एक झटके में रद्द किए जा सकते हैं। 2007 के उदाहरण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बताया कि पहले भी लंबित फाइलों को अचानक बंद कर दिया गया था, जिससे आवेदकों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
भारतीय छात्रों पर असर
भारत से कनाडा जाने वाले छात्रों पर पहले ही इसका प्रभाव दिख रहा है। अगस्त 2025 में 74% भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट रिजेक्ट किए गए, जबकि 2023 में यह प्रतिशत 32% था। यानी पढ़ाई के लिए कनाडा जाना अब और मुश्किल हो गया है।
पिछले और वर्तमान दबाव
कनाडा सरकार फिलहाल स्थायी और अस्थायी रूप से नए लोगों के आगमन को नियंत्रित करना चाहती है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार पर देश में बढ़ती आप्रवासन-विरोधी भावना (anti-immigration sentiment) के कारण नए आवेदकों की संख्या कम करने का दबाव है। इसी महीने सरकार अपनी नई Immigration Levels Plan पेश करने वाली है, जो इस दिशा में और कठोर कदम उठा सकती है।
कुल मिलाकर, भारतीयों का “कनाडा ड्रीम” इस बिल के लागू होने के बाद भारी जोखिम में दिखाई दे रहा है। छात्रों, कामगारों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी और वीजा प्रक्रियाओं में तेजी से अपडेट रहना होगा।