CBSE का बड़ा फैसला! 10वीं के छात्रों के लिए गणित और विज्ञान के नियमों में बदलाव

नई दिल्ली। शिक्षा प्रणाली में बदलाव करते हुए Central Board of Secondary Education ने कक्षा 10 के छात्रों के लिए गणित और विज्ञान विषयों की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन किया है। बोर्ड ने इन दोनों विषयों के लिए दो-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली लागू करने की घोषणा की है। यह नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी और इसका उद्देश्य छात्रों में विश्लेषणात्मक समझ और विषय की गहराई को बढ़ावा देना है।

कॉमन सिलेबस के साथ मिलेगा एडवांस्ड परीक्षा का विकल्प

नए नियमों के तहत सभी छात्रों को पहले की तरह सामान्य पाठ्यक्रम के आधार पर गणित और विज्ञान की पढ़ाई करनी होगी। मुख्य थ्योरी परीक्षा 80 अंकों की होगी और इसके लिए तीन घंटे का समय निर्धारित किया जाएगा। इसके अलावा इच्छुक छात्रों के लिए एडवांस्ड स्तर की परीक्षा देने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। यह अतिरिक्त पेपर 25 अंकों का होगा और इसे हल करने के लिए एक घंटे का समय दिया जाएगा। यह परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है जो इन विषयों में गहराई से अध्ययन करना चाहते हैं।

मार्कशीट में अलग से दर्ज होगा एडवांस्ड स्तर

बोर्ड के अनुसार, एडवांस्ड परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मार्कशीट में विशेष उल्लेख किया जाएगा, जिससे यह प्रमाणित होगा कि छात्र ने एडवांस्ड स्तर की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की है। हालांकि, इन अंकों को कुल प्रतिशत में शामिल नहीं किया जाएगा। यदि कोई छात्र इस स्तर को पास नहीं कर पाता है, तो उसकी मार्कशीट पर इसका कोई उल्लेख नहीं होगा और इससे उसके कुल परिणाम पर कोई नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ेगा।

इंटरनल असेसमेंट में नहीं होगा कोई बदलाव

नई व्यवस्था केवल थ्योरी परीक्षा पर लागू होगी। कक्षा 10 के लिए 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन पहले की तरह ही जारी रहेगा, जिसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।

पुरानी प्रणाली होगी समाप्त

इस बदलाव के साथ ही बोर्ड ने मौजूदा गणित बेसिक और स्टैंडर्ड प्रणाली को समाप्त करने का फैसला किया है। हालांकि वर्तमान सत्र में पढ़ रहे छात्र पुराने पैटर्न के अनुसार ही परीक्षा देंगे और नई प्रणाली अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगी।

फेल होने पर मिलेगा वैकल्पिक विषय का सहारा

छात्रों को राहत देने के लिए बोर्ड ने एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया है। यदि कोई विद्यार्थी गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों में से किसी एक में असफल हो जाता है, लेकिन किसी वैकल्पिक विषय में पास है, तो उस वैकल्पिक विषय को असफल विषय के स्थान पर जोड़ा जा सकेगा। इससे छात्रों को अपना शैक्षणिक वर्ष बचाने और परिणाम सुधारने में मदद मिलेगी।

बोर्ड का मानना है कि यह नई व्यवस्था छात्रों को विषयों को बेहतर ढंग से समझने, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए तैयार होने और शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला बनाने में सहायक साबित होगी।

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