छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने 10 प्रकरणों पर की सुनवाई, पीड़िताओं को दिलाया न्याय

जगदलपुर! छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्यगण दीपिका शोरी,  ओजस्वी मंडावी,  सरला कोसरिया एवं  लक्ष्मी वर्मा ने गुरुवार को कलेक्टोरेट बस्तर के सभाकक्ष में महिला उत्पीडन से संबंधित प्रकरणों पर जन सुनवाई की। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष डॉ. किरणमयी की अध्यक्षता में आज प्रदेश स्तर पर 333 वीं एवं बस्तर जिला में आज 09 वीं सुनवाई हुई। जिले में आयोजित जन सुनवाई में 10 प्रकरणों पर सुनवाई की गई।

आज के सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में दोनो पक्षों के मध्य संपत्ति विवाद का मामला है, जिसको लेकर धरेलू हिंसा का प्रकरण न्यायालय में शुरू हो चुका है। एक शौचालय के विवाद के कारण उभय पक्ष समसौता करने को तैयार नहीं है अतः प्रकरण नस्ती बद्ध किया गया।

अन्य प्रकरण में आवेदिका ने जो शिकायत आवेदन लगाया था, उस पर अनावेदक का पक्ष लिया गया कि दोनो के मध्य विवाद जैसा कोई प्रकरण नहीं था। अतः समझाईश के बाद आवेदिका ने प्रकरण वापस लिया। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

अन्य प्रकरण में आवेदिका 90 वर्षीया वृद्ध महिला है, वह नीचे परिसर में गाड़ी में बैठी है। उसका बड़ा पुत्र उपस्थित, जो शा. हा. स्कूल बंलाजी में भूगोल के लेक्चरर है, वह उपस्थित हुये। अनावेदक आवेदिका का छोटा बेटा है, जो खेती किसानी करता है। वह शुरू से आवेदिका को अपने साथ रखा था। पारिवारिक संपत्ति का बटवारा में आवेदिका का सवा तीन एकड़ जमीन था और सभी पुत्र को स्वा तीन एकड़ जमीन किसी बटवारा 2014 में हुआ था। पारिवारिक समझौते के तरह यह तय हुआ था कि जो पुत्र आवेदिका का पालन पोषण करेगा, वह अनावेदक के जिम्मे था और वह अपनी माँ की संपत्ति को उपयोग करेगा। क्योंकि यह अनावेदक अनपढ़ था।

इसको जानते हुये आवेदिका के 89 वर्ष की उम्र तक अनावेदक ने उसका पालन-पोषण किया, पर आवेदिका के मझले पुत्र ने वर्ष पूर्व आवेदिका को अपने साथ ले आया और वर्ष 2017 में आवेदिका बहला फुसलाकर उसके नाम की 01 एकड़ 60 डिसमिल जमीन को अपने नाम रजिस्ट्री करा लिया और गांव के मकान की जमीन को भी अपने नाम करा लिया। इससे स्पष्ट है कि आवेदिका का मंझला पुत्र शा. स्कूल में लेक्चरर है, वह आवेदिका को संपत्ति हड़प करने माँ को अपने साथ रखा है और उसी आड़ में माँ के नाम पर जो संपत्ति है और गाँव का पुश्तैनी मकान को भी अपनेनाम पर रजिस्ट्री करा लिया है और माँ की तहत से आयोग में फर्जी मामला प्रस्तुत किया है।

अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया अनावेदक को आज के प्रकरण की निःशुल्क प्रति प्रदान की जाये ताकि वह इसे न्यायालय में प्रस्तुत कर रजिस्ट्री को शुन्य करा सके। यदि मंझला पुत्र के द्वारा पारिवारिक सुलह में विशेष किया जाता है। तो उनके शासकीय सेवा में आयोग के द्वारा निलंबन की कार्यवाही किया जा सकता है। प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

अन्य प्रकरण आवेदिका और अनावेदक क्र. 01 और 02 उपस्थित अनावेदक क्र. 01 को समझाइश दिया गया था किवह अपने ग्यारह वर्षीय पुत्र को लेकर आयोग में उपस्थित हो कर वो बहाने कर रहा है और अपने दूसरे विवाह को स्वीकार करने के बाद आवेदिका का चरित्र ध्वस्त करने का प्रयास कर रहा है। आयोग की ओर से अनावेदक क्र. 01 मुक्तांजली वाहन जगदलपुर में (ढिमरापाल मेडिकल कॉलेज) में कार्य करता है। उसके मेडिकल कॉलेज में कार्य सेवा समाप्त करने का अनुशंसा भेजा जायेगा तथा अनावेदिका 02 जो शास. कोमलदेव हॉस्पिटल ने नर्स के पद पर कार्यरत है, उसकी सेवा समाप्ति की अनुशंसा इसलिये किया जायेगी क्योकि उसने विवाहित व्यक्ति से दूसरा विवाह किया है और आवेदिका का जीवन खराब किया है।

इस स्तर पर दोनो अनावेदक ने अपनी गलती स्वीकार किया और दोनो ने प्रस्ताव दिया कि दोनो मिलकर 10,000/- दोनो बच्चों और पत्नी की परवरिश के लिये प्रतिमाह देंगे और अनावेदक क्र. 01 प्रोटेक्शन ऑफिसर के साथ जाकर अपने 11 वर्षिय पुत्र को आवेदिका को देगा। वो उसके सारे गहने, दस्तावेज और सामान आवेदिका को सुपुत्र करेगा तथा अपना आधार कार्ड की कापी दोनो बच्चों के समस्त दस्तावेज आवेदिका को सुपुर्द करेगा और इस बात को भी सुनिश्चित करेगा कि आवेदिका के साथ कोई भी दुर्व्यवहार न करे।

इस प्रकरण से पीओ के वीनू हिरवानी को नियुक्त किया जाता हैं कि प्रतिमाह आवेदिका को भरण पोषण मा की 10 तारीख तक मिल रहा है कि नहीं सुनिश्चित करें और इस प्रकरण की नियमित देखरेख मान शोरी जी और मान. मंडावी मैडम करेंगें अनावेदक गणों के द्वारा कभी भी भरण पोषण में लापरवाही किये जाने पर दोनो अनावेदिकगणों की सेवा समाप्ति की अनुशंसा किया जायेगा।

आवेदिकाको बच्चे व सामान मिलने के पश्चात प्रकरण नस्तीबद्ध किया जायेगा। आवेदिका को आर्डरशीट की निःशुल्क प्रति पीओ और आवेदिका को दिया जाता है।

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