रायपुर। कभी सीमित संसाधनों और पांच जिला अस्पतालों पर निर्भर रहने वाला छत्तीसगढ़ आज मध्य भारत का प्रमुख मेडिकल हब बन चुका है। राज्य निर्माण के 25 वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं ने अभूतपूर्व विकास किया है। अब प्रदेश में 15 मेडिकल कॉलेज, 33 जिला अस्पताल, सात डेंटल कॉलेज, एम्स रायपुर, और दर्जनों कॉर्पोरेट एवं सुपर स्पेशलिटी अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं का नया चेहरा बन चुके हैं।
राज्य गठन से पहले रायपुर का डीके अस्पताल मात्र 100 बिस्तरों वाला प्रमुख सरकारी अस्पताल था, जहाँ आसपास के जिलों के मरीज उपचार के लिए आते थे। दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़ और जगदलपुर के जिला अस्पताल उस समय क्षेत्रीय स्वास्थ्य केंद्र के रूप में काम करते थे। लेकिन राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की।
एमबीबीएस की पढ़ाई पहले केवल रायपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज तक सीमित थी, परंतु अब राज्य के विभिन्न हिस्सों में नए मेडिकल कॉलेज खुल चुके हैं। निजी क्षेत्र ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है, जिससे प्रदेश में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की पहुँच तेजी से बढ़ी है।
वर्ष 2012 में एम्स रायपुर की स्थापना छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र की दिशा और दशा दोनों बदलने वाला कदम साबित हुई। यहाँ आज हृदय, कैंसर, किडनी और न्यूरो जैसी गंभीर बीमारियों का उपचार उच्च स्तर पर संभव है। पहले जिन बीमारियों के लिए मरीजों को मुंबई या हैदराबाद जाना पड़ता था, अब उनका इलाज राज्य में ही उपलब्ध है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाओं ने गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देकर राहत पहुंचाई है। राज्य सरकार ने निजी अस्पतालों को सब्सिडी और प्रोत्साहन देकर स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत किया है।
वर्तमान में राजधानी रायपुर के साथ-साथ बिलासपुर और जगदलपुर में शासकीय सुपर स्पेशलिटी अस्पताल कार्यरत हैं, वहीं कई बड़े निजी स्वास्थ्य समूह छत्तीसगढ़ में अपने अस्पताल खोलने की तैयारी कर रहे हैं।
आज 25 साल का छत्तीसगढ़ न सिर्फ आत्मनिर्भर है, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों को भी उपचार की आधुनिक सुविधाएँ प्रदान कर रहा है — यह उपलब्धि राज्य की स्वास्थ्य क्रांति का प्रमाण है।