नई दिल्ली : भारत की अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील्स की चर्चा अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ पहले ही सुर्खियों में रही है, लेकिन अब मोदी सरकार ने दक्षिण अमेरिका के महत्त्वपूर्ण देश चिली के साथ एक बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी दिखाई है। यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और क्लीन एनर्जी योजनाओं के लिए गेमचेंजर साबित होगा।
चीन के एकाधिकार पर लग सकता है रोक
आधुनिक दुनिया में केवल पूंजी ही नहीं, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कॉपर, कोबाल्ट, रीनियम और मॉलीब्डीनम बेहद जरूरी हैं। ये मिनरल्स इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों के लिए रणनीतिक संसाधन बन चुके हैं। फिलहाल, इन खनिजों की ग्लोबल सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है और उसने कई बार इसका इस्तेमाल अन्य देशों की आपूर्ति रोकने के लिए किया है। ऐसे में भारत के लिए चीन पर निर्भरता कम करना आवश्यक है। चिली के साथ यह FTA इसी दिशा में एक ठोस कदम है।
चिली: खनिजों का पावरहाउस
चिली केवल एक ट्रेड पार्टनर नहीं, बल्कि क्रिटिकल मिनरल्स का वैश्विक हब है।
- लिथियम: स्मार्टफोन बैटरी, इलेक्ट्रिक कार और बड़े एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स के लिए।
- कॉपर: विश्व का लगभग 23% उत्पादन चिली से।
- रीनियम, मॉलीब्डीनम, कोबाल्ट: मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी लक्ष्यों के लिए जरूरी।
यह संसाधनों की प्रचुरता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ग्रीन एनर्जी लक्ष्यों को सशक्त करेगी।
सिर्फ व्यापार नहीं, अब साझेदारी का नया दौर
भारत और चिली के रिश्ते पुराने हैं। 2006 में हुए प्रीफेरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) ने नींव रखी थी, लेकिन अब समझौता कंप्रहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) में बदल रहा है। इस नए FTA में ट्रेड, डिजिटल सर्विसेज, निवेश और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग शामिल होगा। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसके जल्द फाइनल होने के संकेत दिए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का चिली से आयात 72% बढ़कर 2.60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो स्पष्ट करता है कि भारतीय इंडस्ट्री के लिए चिली के संसाधन कितने महत्वपूर्ण हैं।
प्राइवेट सेक्टर ने भी कदम बढ़ाया
सरकार के प्रयासों के साथ भारतीय कंपनियां भी चिली में सक्रिय हो रही हैं।
- कोल इंडिया ने चिली में एक होल्डिंग कंपनी बनाने को मंजूरी दी, जो क्रिटिकल मिनरल्स की संभावनाएं तलाशेगी।
- अडानी ग्रुप ने चिली की सरकारी कंपनी Codelco के साथ कॉपर प्रोजेक्ट्स में साझेदारी की, जिसमें तीन बड़े प्रोजेक्ट्स का गहन मूल्यांकन शामिल है।
इस समझौते के पूरा होने के बाद भारत चीन पर अपनी निर्भरता कम कर पाएगा, मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनेगा और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करेगा।