नेशनल डेस्क: स्वच्छ भारत मिशन 2025 की नवीनतम रिपोर्ट ने देशभर के शहरों की सफाई व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस बार छोटे और मझोले शहरों ने स्वच्छता के मामले में बड़ी छलांग लगाई है, जबकि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े महानगर पिछड़ गए हैं।
बड़े शहरों की रैंकिंग में गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, देश के सबसे गंदे शहरों की सूची में इस बार मदुरै पहले स्थान पर रहा है। उसके बाद लुधियाना, चेन्नई, रांची और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों का नाम शामिल है। वहीं दिल्ली, ग्रेटर मुंबई और श्रीनगर जैसे मेट्रो शहर भी निचले पायदानों पर पहुंचे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आबादी और अव्यवस्थित शहरीकरण ने इन शहरों की सफाई व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।
छोटे शहर बने मिसाल
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद कई छोटे शहरों ने कचरा प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं। नियमित कचरा पृथक्करण, स्थानीय प्रशासन की तत्परता और नागरिकों की भागीदारी ने इन शहरों को स्वच्छता के नए मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
स्वच्छ भारत मिशन की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, शहर की सफाई सिर्फ बजट या मशीनों पर निर्भर नहीं करती — असली सफलता सुनियोजित नीति, प्रभावी प्रशासन और नागरिक जागरूकता से मिलती है। बड़े शहरों में सफाई अभियान तो चलाए जा रहे हैं, लेकिन उनमें स्थायी प्रभाव और निगरानी की कमी देखने को मिली है।
विशेषज्ञों की राय
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी पहल से स्थायी स्वच्छता संभव नहीं है। जब तक नागरिक खुद जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक बदलाव अधूरा रहेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, छोटे शहरों ने साबित किया है कि कम संसाधनों में भी सामूहिक प्रयास से स्वच्छता का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।