पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एनडीए गठबंधन की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही अपने मंत्रिपरिषद का विस्तार कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दिसंबर में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है और दोनों दलों—जदयू व भाजपा—ने संभावित चेहरों को लेकर मंथन तेज कर दिया है।
कुल 9 मंत्री पद रिक्त, जदयू कोटे में सबसे ज्यादा जगह
फिलहाल बिहार में मंत्रिमंडल की अधिकतम सीमा 36 है, लेकिन इसमें अभी 9 पद खाली हैं।
- जदयू के 6 पद खाली
- भाजपा के 3 पद रिक्त
जदयू अपने हिस्से के पदों को जल्द भरने के पक्ष में है, ताकि संगठनात्मक और सामाजिक समीकरणों को और मजबूत किया जा सके।
कैबिनेट विस्तार की जरूरत क्यों?
नई विधानसभा के गठन के बाद मौजूदा मंत्रिमंडल अक्षरों में छोटा है। प्रशासनिक कामकाज को गति देने और सत्ता संतुलन सुनिश्चित करने के लिए दोनों दल विस्तार को आवश्यक मान रहे हैं। इसके साथ ही क्षेत्रीय और जातीय प्रतिनिधित्व को भी नया स्वरूप देने की तैयारी है।
- जदयू किन चेहरों को दे सकती है मौका?
- सूत्र बताते हैं कि जदयू इस बार उन विधायकों को प्राथमिकता देना चाहती है जो—
- कुशवाहा समुदाय,
- EBC (अति पिछड़ा वर्ग)
- और अन्य प्रभावी सामाजिक वर्गों से आते हों।
इन समुदायों के विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल कर पार्टी 2025 के आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधना चाहती है।
भाजपा भी कर रही है आंतरिक चर्चा
भाजपा भी अपने कोटे के तीन पदों के लिए नामों को अंतिम रूप देने में जुटी है। पार्टी ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है जो संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ सरकार में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रख सकें।
क्या होगा अगले महीने?
यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो दिसंबर में बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। नए चेहरों के शामिल होने से सत्ता संतुलन, सामाजिक समीकरण और राजनीतिक रणनीति—तीनों में बदलाव के संकेत साफ दिखेंगे।