दिल्ली शब्दोत्सव 2026: सीएम रेखा गुप्ता ने विदेशी मंचों पर भारत की आलोचना करने वालों को दिया करारा जवाब

नई दिल्ली: दिल्ली शब्दोत्सव 2026 के मंच से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भारतीय संस्कृति, पहचान और राष्ट्रबोध पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए उन नेताओं पर तीखा तंज कसा, जो विदेशों में भारत की छवि को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो व्यक्ति दुनिया के सामने अपने ही देश के बारे में अपमानजनक या हल्के शब्दों का प्रयोग करता है, वह भारत की आत्मा और उसकी परंपराओं को समझ ही नहीं सकता।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत केवल भौगोलिक सीमाओं का नाम नहीं है, बल्कि यह विचार, संस्कार और सभ्यता की निरंतर बहती धारा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की आलोचना अपने घर में की जा सकती है, लेकिन वैश्विक मंच पर अपने राष्ट्र को नीचा दिखाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

संस्कृति और आधुनिकता का संतुलन जरूरी
रेखा गुप्ता ने शब्दोत्सव को भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह आयोजन अतीत की विरासत, वर्तमान की सोच और भविष्य की दिशा—तीनों को जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज का भारत तकनीक और विज्ञान में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही सशक्त बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दिल्ली जैसे महानगर में इस तरह का आयोजन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां पूरे देश की विविधता एक साथ दिखाई देती है। अलग-अलग राज्यों के त्योहार, भाषाएं और परंपराएं राजधानी को भारत की सांस्कृतिक झलक बनाती हैं।

भारतीय विविधता का उत्सव
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने दिल्ली में मनाए जाने वाले विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छठ पूजा, गणेशोत्सव, डांडिया, कांवड़ यात्रा और दीपावली जैसे आयोजनों में लोगों की भागीदारी यह साबित करती है कि दिल्ली केवल एक शहर नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक राजधानी है।

उन्होंने बताया कि शब्दोत्सव के दौरान कई नई पुस्तकों का विमोचन किया गया, जो साहित्य और विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। रेखा गुप्ता ने कहा कि यह समय भारतीयता के पुनर्जागरण का है, जहां विकास और विरासत साथ-साथ चल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अंत में भरोसा दिलाया कि दिल्ली शब्दोत्सव की यह शुरुआत एक परंपरा बनेगी और आने वाले वर्षों में इसे और भी व्यापक व भव्य रूप दिया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़ी रह सके।

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