केंद्र में तैनाती और चुनाव ड्यूटी से बढ़ी मुश्किल, छत्तीसगढ़ में IAS-IPS की भारी कमी

रायपुर: छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था इस समय अधिकारियों की कमी की चुनौती से गुजर रही है। राज्य में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के कई पद खाली पड़े हैं, जिससे सरकारी कामकाज पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। मंत्रालय से लेकर जिलों तक कई अधिकारियों को एक साथ कई जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं।

कई पद अब भी खाली

मौजूदा आंकड़ों के अनुसार राज्य में IAS के कुल 202 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 173 अधिकारी ही कार्यरत हैं। यानी करीब 29 पद अभी भी रिक्त हैं। इनमें 128 अधिकारी सीधे भर्ती से आए हैं, जबकि 47 अधिकारी पदोन्नति के जरिए सेवा में पहुंचे हैं।
वहीं IPS कैडर की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। राज्य में 153 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 134 अधिकारी ही तैनात हैं, जिससे 19 पद खाली हैं।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का असर

छत्तीसगढ़ कैडर के कई अधिकारी इस समय केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक करीब 21 IAS अधिकारी फिलहाल केंद्र में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ये अधिकारी नीति निर्माण, आंतरिक सुरक्षा और निवेश जैसे अहम क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। हाल ही में 2016 बैच के एक IAS अधिकारी को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में उप सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। सामान्यतः केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अवधि पांच साल की होती है, जिसे विशेष परिस्थितियों में सात साल तक बढ़ाया जा सकता है।

एक अधिकारी के पास कई विभाग

अधिकारियों की कमी के कारण कई वरिष्ठ अधिकारियों को एक साथ कई विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। इससे प्रशासनिक फैसलों और योजनाओं के क्रियान्वयन की गति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

चुनावी जिम्मेदारियों से बढ़ेगी मुश्किल

आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए छत्तीसगढ़ से 30 अधिकारियों को अन्य राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में भेजा जाएगा। इनमें 25 IAS और 5 वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल हैं। ये अधिकारी करीब एक महीने तक चुनावी ड्यूटी पर रहेंगे, जिससे राज्य में अधिकारियों की कमी और अधिक बढ़ सकती है।

प्रशासन पर बढ़ता दबाव

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और चुनावी जिम्मेदारियों के कारण राज्य के प्रशासनिक ढांचे पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि जल्द नए अधिकारियों की नियुक्ति या वापसी नहीं होती, तो शासन-प्रशासन के कामकाज पर इसका असर और स्पष्ट रूप से दिख सकता है।

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