मुंबई। देश में डिजिटल भुगतान की रफ्तार लगातार तेज होती जा रही है और अब रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक जुलाई से सितंबर तिमाही के दौरान यूपीआई के जरिए रिकॉर्ड स्तर पर लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जिससे भारत की कैशलेस अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
इस तिमाही में यूपीआई के माध्यम से 59 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब एक-तिहाई अधिक हैं। इसी दौरान कुल लेनदेन मूल्य लगभग 75 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि डिजिटल भुगतान अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे कस्बों और गांवों तक अपनी पैठ बना चुका है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड की संख्या बढ़कर 70.9 करोड़ हो गई है। बीते एक साल में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। आज किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और ग्रामीण बाजारों में भी क्यूआर कोड के जरिए भुगतान आम हो गया है।
रिपोर्ट बताती है कि यूपीआई का सबसे ज्यादा इस्तेमाल दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हो रहा है। व्यक्ति से व्यापारी (P2M) लेनदेन में तेज उछाल आया है, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन भी लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि, प्रति ट्रांजैक्शन औसत राशि में कमी आई है, जिससे साफ है कि लोग अब छोटी-छोटी जरूरतों—जैसे भोजन, यात्रा, दवाइयों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं—के लिए यूपीआई का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
डिजिटल इकोसिस्टम के विस्तार के साथ देश में पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीनों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, क्रेडिट कार्ड से भुगतान में इजाफा देखा गया है, जबकि डेबिट कार्ड के उपयोग में गिरावट आई है, क्योंकि कम राशि के भुगतान के लिए यूपीआई ज्यादा सुविधाजनक साबित हो रहा है।
मोबाइल और टैप-आधारित पेमेंट भी खासतौर पर शहरी इलाकों, मेट्रो और टैक्सी सेवाओं में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यूपीआई का दायरा और बढ़ेगा। अनुमान है कि 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत तक इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड को व्यापक रूप से लागू किया जाएगा, जिससे पेट्रोल पंप, अस्पताल, सार्वजनिक सेवाओं और यात्रा स्थलों पर एक ही क्यूआर कोड से भुगतान संभव हो सकेगा।